वर्तमान नेपाल की नव निर्मित युवा सरकार उत्साह में जल्द ही नेपाल को अराजकता में झोंक देगी !
2026 के चुनावों में प्रचंड जनादेश के बाद 35 वर्षीय प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली नव-निर्मित सरकार सत्ता के शीर्ष पर पहुँच कर जिस तरह अव्यवस्थित कार्य कर रही है, तो बहुत संभावना है कि नए नेतृत्व का अति-उत्साह और पारंपरिक अनुभव की कमी के कारण नेपाल में अगले मात्र एक वर्ष में अराजकता फैल सकती है। जिसका लाभ अमेरिका और चीन को होगा !
इस भविष्य वाणी के कई कारण हैं ! जैसे :-
किसी भी देश की सरकार के पीछे एक स्थायी नौकरशाही होती है, सेना और न्यायपालिका का अपना तंत्र होता है। युवा नेतृत्व भले ही आक्रामक नीतियां बना ले, लेकिन उन्हें लागू करने वाली प्रशासनिक व्यवस्था रातों-रात नहीं बदली जा सकती है। यह धीमा लेकिन स्थिर तंत्र किसी भी सरकार के अति-उत्साह को पूरी तरह से बेकाबू होने से रोकता है। जिससे शासन और नौकरशाही के मध्य तनाव पैदा होता है और यह तनाव अराजकता का कारण बनता है !
नेपाल, भारत और चीन जैसी दो बड़ी शक्तियों के बीच स्थित एक निर्बल ‘बफर स्टेट’ है। कोई भी सरकार, चाहे वह कितनी भी युवा या उत्साही क्यों न हो, अपनी अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा के लिए स्थापित विदेशी संबंधों को आसानी से नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती है। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के कठोर नियम उन्हें यथार्थवादी बनने को मजबूर करेंगे।
यह अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक असंतुलन भी नेपाल की अराजकता को बढ़ाने में सहायक होंगे !
मेरा सुझाव है कि नेपाल सरकार को सीमा विवादों या राजनीतिक बयानबाजी, आर्थिक और ढांचागत सहयोग (जैसे जलविद्युत निर्यात और पारगमन संधियां) से वर्तमान में स्वयं को अलग रखना चाहिए।
नेपाल की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक विदेशों में काम करने वाले नागरिकों पर टिकी है। नेपाल सरकार को सर्वप्रथम आंतरिक रोज़गार पैदा करने के लिए कृषि आधुनिकीकरण और स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना चाहिये।
जलविद्युत और पर्यटन नेपाल की सबसे बड़ी ताकत है, इसे अन्तराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित और व्यावसायिक बनाना चाहिये !
शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सरकारी सेवाओं (जैसे पासपोर्ट या लाइसेंस बनवाना) को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाना चाहिये।
नेपाली सरकार को प्रशासनिक तंत्र को नष्ट करने के बजाय, उसे अपने विज़न के साथ जोड़ना होगा। नीतियों को सफलतापूर्वक ज़मीन पर उतारने के लिए अनुभवी नौकरशाहों का सहयोग लेना चाहिये।
नेपाल सरकार को अपनी नीतियों को इस प्रकार बनाना चाहिये, जो समावेशी हों और किसी भी क्षेत्र या समुदाय को यह न लगे कि सत्ता के केंद्र (काठमांडू) द्वारा उनकी अनदेखी की जा रही है। विकेंद्रीकरण को बड़े मजबूत और व्यवहारिक करना इसका सबसे अच्छा उपाय है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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