प्रगति की बाधा के चक्रव्यूह को कैसे तोड़ें

युवाओं के लिये विशेष अभियान

मस्तिष्क का डिफेन्स मेकनिजम या रक्षा तंत्र मूल रूप से अवचेतन मन की एक स्वचालित प्रक्रिया है। इसका मुख्य काम हमें मानसिक पीड़ा, तनाव, चिंता और आघात से बचाना है।

जब भी हम जीवन में कुछ नया करने, पुरानी नकारात्मक आदतों को छोड़ने या अपनी कमियों का गहराई से सामना करने का प्रयास करते हैं, तो अवचेतन मन इसे एक ‘खतरे’ के रूप में देखता है। यह तुरंत अस्वीकरण, दमन या युक्तिकरण जैसे मनोवैज्ञानिक हथियारों का उपयोग करके हमें वापस हमारे परिचित ‘कम्फर्ट जोन’ में धकेल देता है।

हम अपनी विफलताओं या डरों को सही ठहराने के लिए तार्किक बहाने गढ़ने लगते हैं। यह एक प्रकार की पुरानी मानसिक प्रोग्रामिंग है, जो हमें इस भ्रम में रखती है कि हम सुरक्षित हैं, जबकि वास्तव में इसी वजह से हमारी प्रगति रुक जाती है।

लंबे समय तक इन रक्षा तंत्रों के पीछे छिपने से व्यक्ति के भीतर अनसुलझी भावनाएं, तनाव और अवसाद पनपने लगता है, क्योंकि मस्तिष्क की भारी ऊर्जा केवल अज्ञात भय को दबाने में खर्च करता है।

यदि प्रगति करना है तो इस काल्पनिक भय से निकलना होगा !

इस हेतु सनातन ज्ञान पीठ युवाओं के लिये एक विशेष कक्षा / शिविर आयोजित करने जा रहा है ! यदि आप भी अपने जीवन को बदलना चाहते हैं, तो तत्काल संस्थान में संपर्क करके अपना पंजीकरण करवा लीजिये ! स्थान सीमित है !!

सच्ची प्रगति तब शुरू होती है जब हम आत्म-निरीक्षण के माध्यम से अपने ही मन की इन चालों को पहचानते हैं। अपने अवचेतन की इस पुरानी प्रोग्रामिंग को सचेत रूप से समझना, कमजोरियों को स्वीकार करना और दर्द से भागने के बजाय उसका सामना करना ही इस चक्र को तोड़ने का मार्ग है। जब हम अपनी ही बनाई मानसिक ढाल को नीचे रखते हैं, तभी यथार्थ में हमारा रूपांतरण संभव होता है।

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

कुण्डली परामर्श हेतु सम्पर्क कीजिये

मोबाईल : 9453092553

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