सद्गुरु का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि सत्य बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा का एक ‘अदृश्य’ जगत है, जहाँ कोई भी सहजता से गुरु का चोला पहनकर दुकान खोल सकता है। इसीलिये इस संसार में सच्चा सद्गुरु होना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
बाजार में बिकने वाली चीजें दृश्य होती हैं, जिन्हें तौला और मापा जा सकता है, लेकिन परमात्मा का ज्ञान ‘अदृश्य’ है। इसका लाभ सद्गुरु की कृपा से मात्र अनुभूति से ही उठाया जा सकता है। सद्गुरु भीड़ जुटाने के बजाय, व्यक्ति के भीतर के ‘अंधेरे’ को मिटाने का कार्य करते हैं।
सद्गुरु की दुर्लभता का एक कारण यह भी है कि वह आपको ‘तैयार’ नहीं करते, बल्कि आपको अपनी ‘खोज’ के लिए स्वतंत्र छोड़ देते हैं। वह आपका हाथ पकड़कर मंजिल तक नहीं ले जाते, बल्कि आपके भीतर वह ज्योति जगाते हैं, जिससे आप स्वयं अपने मंजिल पर पहुँच जाते हैं।
सच्चा सद्गुरु वह नहीं जो अपने अनुयायी बढ़ाये, बल्कि वह है जो शिष्य को स्वयं का ‘गुरु’ बनने में सक्षम बना दे। ऐसे व्यक्ति का मिलना इसलिए भी दुर्लभ है, कि वह अहंकार से परे, एक ऐसे शिखर पर स्थित होता है, जहाँ पर उसे दुनिया देख नहीं सकती है। इसलिये सदगुरु को पाने के लिये ईश्वर कृपा की जरुरत होती है !
सदगुरु आपको इस दुनियां में जीने तो देता है, पर रमने नहीं देता है ! जो गुरु आपको संसार से भागने की सलाह न देकर संसार को भोगते हुये, विरक्त रहने का मार्ग दिखलाये वही सद्गुरु है ! शेष सभी गुरु ठग हैं !
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक – शैव ग्राम
ईश्वर प्राप्ति का दिव्य स्थल
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