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आर्य समाज का पाखण्ड -1 आर्य समाज ने समाज सुधार हेतु काफी काम किये हैं : Yogesh Mishra

आर्य समाज का पाखण्ड -1 आर्य समाज ने समाज सुधार हेतु काफी काम किये हैं ! . सत्यता : आर्य समाज ने सिर्फ वही कार्य किये हैं, जो अंग्रजों ने उन्हें सौंपे थे ! जब भारतीय समाज में कोई बुराई…

लोकतंत्र में लाठीचार्ज का औचित्य : Yogesh Mishra

बताया जाता है कि भारत में आज तथाकथित लोकतंत्र है ! लोकतंत्र का तात्पर्य शासन तंत्र जो लोक इच्छा से चले ! इसीलिये हमारे यहां केंद्र में संसद है और राज्य में विधानसभाओं की स्थापना की गई है ! जिसके…

छात्र नहीं शिक्षण संस्थान ही अयोग्य होते हैं !! Yogesh Mishra

भारत में बढ़ती बेरोजगारी पर चिन्तन कल सायंकाल में एक कार्यक्रम में गया था ! वहां पर युवाओं की योग्यता को लेकर चर्चा होने लगी ! चर्चा में शामिल अधिकांश लोगों का यह मत था कि आज के शिक्षित छात्र…

महात्मा गाँधी की सत्यार्थ प्रकाश के बारे में राय : Yogesh Mishra

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने अपने अखब़ार ‘यंग इंडिया’ में 29 मई 1920 में लिखा है, “मेरे दिल में दयानंद सरस्वती के लिए भारी सम्मान है ! मुझे ऐसा लगता है कि उन्होंने हिन्दू समाज की बहुत भारी सेवा की…

सनातन इतिहास को विकृत करने का कार्य मैकडानल ने किया था : Yogesh Mishra

हमारे सनातन इतिहास का विकृतीकरण करने का कार्य मैकडानल ने विशेष रूप से किया ! उन्होंने अपनी पुस्तक ‘वैदिक रीडर’ में लिखा-”ऋग्वेद की ऋचाओं से प्राप्त ऐतिहासिक सामग्री से पता चलता है कि ‘इण्डो आर्यन’ लोग सिंधु पार करके भी…

क्या कंप्यूटर आदि कृतिम वस्तुओं को भी तंत्र से प्रभावित किया जा सकता है ! Yogesh Mishra

मेरे अपने निजी अनुभव में यह आया है कि कंप्यूटर आदि कृतिम वस्तुएं जो मनुष्य के लिये सहायक हैं या जहां कहीं भी ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है ! वह सभी चीजे तंत्र से प्रभावित की जा सकती हैं…

क्या कंप्यूटर द्वारा भी तंत्र, मंत्र, अनुष्ठान आदि किया जा सकता है ! Yogesh Mishra

आज कंप्यूटर का युग है ! कंप्यूटर के द्वारा कृतिम बौद्धिकता के सैकड़ों आयाम प्रस्तुत किये जा रहे हैं ! ऐसी स्थिति में कोई आश्चर्य नहीं कि आगामी युग में विश्व में ट्रेन और वाहनों का संचालन सफलतापूर्वक कंप्यूटर द्वारा…

क्या स्वामी दयानंद सरस्वती ईसाई एजेंट था ! Yogesh Mishra

स्वामी दयानंद न केवल ईसाई संस्था थियोसोफिकल सोसायटी के अहम सदस्य थे बल्कि थियोसोफिकल सोसायटी के संस्थापकों को पत्र लिखकर उसे भारत में लाने वाले भी दयानंद ही थे ! 1878 से लेकर अपनी मृत्यु 1883 तक स्वामी जी ने…

दयानन्द सरस्वती की जहर से नहीं हुई थी मौत : Yogesh Mishra

कहा जाता है कि वर्ष 1883 में वे जोधपुर नरेश महाराजा जसवन्त सिंह के निमन्त्रण पर जोधपुर आये हुये थे ! वहां पर उन्होंने नन्ही नामक वेश्या का अनावश्यक हस्तक्षेप और महाराजा जसवन्त सिंह पर उसका अत्यधिक प्रभाव देखा !…

नागपाश शत्रु को बंधन में बाँध लेने वाले प्राचीनकाल के अस्त्र का नाम है ! Yogesh Mishra

नागपाश संकटमोचन हनुमानाष्टक रावण जुद्ध अजान कियो तब ! नाग कि फांस सबै सिर डारो ! श्री रघुनाथ समेत सबै दल ! मोह भयो यह संकट भारो ! आनि खगैस तबै हनुमान जु ! बन्धन काटि सुत्रास निवारो ! को…