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शिव भक्ति सरल, सहज, सस्ती, प्रकृति अनुकूल और अनुकरणीय क्यों है ? : Yogesh Mishra

शैव साहित्यों की शृंखला ही बहुत विस्‍तृत है ! वैरोचन के ‘लक्षणसार समुच्‍चय’ में इन आगमों के विशाल वांगमय का विस्‍तार से वर्णन है ! शिव के शास्‍त्र के रूप में ‘शिवधर्म’ और ‘शिवधर्मोत्‍तर’ ग्रंथों को शैव साधकों द्वारा रचा…

शनि देव कैसे खुश होते हैं  : Yogesh Mishra

 (शोध परक लेख) प्राय: समाज में शनि की महादशा अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा बड़े भय से देखी जाती है !  साथ ही नव उदित ज्योतिष के अनुसार अब शनि की ढैया और साढ़ेसाती को भी भय से देखे जाने का…

व्यापार का आधार मात्र पूंजी और योजना नहीं है : Yogesh Mishra

उद्यम असफल होने के कई कारण हैं, किंतु इसमें सबसे पहला कारण यह है कि उद्यमी को यह पता ही नहीं होता है कि उसके उद्यम की दिशा सही है या गलत है ?  अर्थात दूसरे शब्दों में यह कहा…

वैष्णव संतों का वास्तविक चेहरा : Yogesh Mishra

वैष्णव धर्म ग्रंथों के अनुसार भारत में जब वैष्णव जीवन शैली अपने पूर्ण प्रसार पर थी ! तब दो महायुद्ध हुए ! एक राम रावण का युद्ध और दूसरा महाभारत का धर्म युद्ध और यह दोनों ही युद्ध धर्म और…

वैष्णव लेखकों ने समाज को कैसे विकास विरोधी बना  : Yogesh Mishra

सभी कथावाचक बतलाते हैं कि रामायण समाज के हर वर्ग को जोड़ने का दिव्य ग्रंथ है !  यह कोई भी कथावाचक नहीं बतलाता है कि रामायण ने ही व्यक्ति के स्वतन्त्र चिंतन करने और अपनी राय प्रकट करने के संदर्भ…

वैष्णव द्वारा बनाया गया मंत्र प्रपंच : Yogesh Mishra

इसमें कोई शक नहीं है कि आज अधिकांश सनातन धर्मी वैष्णव जीवन शैली का अनुगमन करते हैं ! लेकिन यह सनातन धर्मी वैष्णव जीवन शैली का अनुगमन करने के चक्कर में खुद तो पथभ्रष्ट हो ही गये हैं ! साथ…

वैष्णव दो तरह के होते हैं : Yogesh Mishra

 वैष्णव दो तरह के होते हैं ! एक अर्ध वैष्णव, दूसरे पूर्ण वैष्णव ! अर्ध वैष्णव से तात्पर्य ऐसे वैष्णव लोगों से है, जो मठ मंदिरों के मुखिया हैं ! कथावाचक हैं या महंगे कर्मकांडी ब्राह्मण हैं !  प्राय: यह…

मात्र विद्या से विनय नहीं बल्कि अहंकार आता है : Yogesh Mishra

एक सूक्ति है “विद्या ददाति विनयम” अर्थात “विद्या से विनय की प्राप्ति होती है ! लेकिन यह सूक्ति गलत है ! विद्या से विनय की प्राप्ति नहीं होती है विद्या से अहंकार की प्राप्ति होती है ! जब व्यक्ति विद्या…

वाल्मीकि ने रामायण लिखी ही नहीं थी : Yogesh Mishra

महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रत्नाकर था और इनके पिता ब्रह्माजी के मानस पुत्र प्रचेता थे ! ब्रह्मर्षि भृगु के वंश में उत्पन्न ब्राह्मण थे ! जिसकी पुष्टि स्वयं वाल्मीकि रामायण और महाभारत नामक ग्रन्थ से होती है ! ‘“संनिबद्धं…

लाक्षाग्रह का सत्य : Yogesh Mishra

प्रयागराज इलाहबाद से 50 किलोमीटर दूर हंडिया के तथाकथित लाक्षागृह के निकट गंगा घाट पर बरसात के कारण टीला की मिट्टी ढह जाने के कारण करीब छह फीट चौड़ा सुरंग दिखाई देने लगी ! क्षेत्र में सुरंग की बात चर्चा…