सामाजिक जीवन में पारदर्शिता का महत्व : Yogesh Mishra

जब व्यक्ति सामाजिक जीवन जीने का निर्णय लेता है, तब उसके जीवन में निजीता जैसी कोई चीज नहीं रह जाती है ! व्यक्ति के हर कृत्य का विश्लेषण समाज करने लगता है और इस विश्लेषण के आधार पर ही समाज…

जब व्यक्ति सामाजिक जीवन जीने का निर्णय लेता है, तब उसके जीवन में निजीता जैसी कोई चीज नहीं रह जाती है ! व्यक्ति के हर कृत्य का विश्लेषण समाज करने लगता है और इस विश्लेषण के आधार पर ही समाज…

यदि आप सामान्य मनुष्य की तरह जीवन जीकर नहीं मरना चाहते हैं, बल्कि आत्म कल्याण के साथ लोक कल्याण की कामना भी रखते हैं ! तो आपके लिए सनातन ज्ञान पीठ एकदम सही जगह है ! सनातन ज्ञान पीठ एक…

समाज में संपन्नता पूर्वक जीवन निर्वहन करने के लिए कुछ व्यावहारिक युक्तियां होती हैं ! जिन्हें किसी भी शिक्षण संस्थान के किसी भी पाठ्यक्रम में नहीं पढ़ाया जाता है ! जिसकी जानकारी के अभाव में मनुष्य पूरे जीवन आर्थिक संघर्ष…

जैसे कोई व्यक्ति स्वभाव से ही लापरवाह होता है और कोई दूसरा व्यक्ति अपने कार्य के प्रति बहुत सजग होता है, इसी तरह कुछ लोग स्वभाव से ही समय बर्बाद करते हैं और कुछ लोग समय को लेकर बहुत सजग…

संपन्नता एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का परिणाम है ! जिस तरह किसी वृक्ष से फल को प्राप्त करने के लिए उस वृक्ष को निरंतर पोषित करना पड़ता है ! ठीक उसी तरह व्यक्ति को संपन्न बनाने के लिए अपने…

किसी भी व्यक्ति के जीवन में ज्योतिषी की भूमिका मात्र इतनी ही है कि वह उसे भविष्य में होने वाली घटनाओं की ग्रह गणना के अनुसार एक अनुमानित परिस्थितियों की सूचना देता है ! लेकिन इस सटीक सूचना को देने…

भाग्यवादी आदमी कभी भी पुरुषार्थवान नहीं हो सकता है और कथावाचक व्यक्ति को ईश्वरवादी कम भाग्यवादी अधिक बना देते हैं ! जो लोग बहुत भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिये बहुत अधिक कथा आदि सुनते हैं, उनकी दृष्टि इस…

श्री शब्द का सबसे पहले ऋग्वेद में उल्लेख मिलता है ! अनेक धर्म पुस्तकों में लिखा गया है कि ‘श्री’ शक्ति का सूचक है ! श्री अर्थात जिस व्यक्ति में विकास करने की और खोज की शक्ति होती है !…

वैष्णव परंपरा में समाज को नियंत्रित करने के लिए जो पीठों की स्थापना की जाती है, वह बाह्य आडंबर पर आश्रित होती है ! इसी परंपरा के अनुपालन में आज से कुछ समय पूर्व कुछ विकृत मानसिकता के तथाकथित शैवों…

डिजिटल वर्ल्ड के नाम पर आज समाज को बहुत व्यवस्थित तरीके से गैर जिम्मेदार, अज्ञानी, भ्रमित और निर्धन बनाया जा रहा है । इसके विपरीत आज विश्व के किसी भी शिक्षण संस्थान में व्यक्ति को धनवान और जिम्मेदार बनने का…