खरमास में पंचाक्षर मंत्र का महत्व
खरमास की पूर्व संध्या पर पंचाक्षर मन्त्र जप के महत्व पर विशेष बैठक दिनांक 16 दिसंबर 2025 से खरमास शुरू हो रहा है, जो बुधवार 14 जनवरी 2026 तक चलेगा ! खरमास के महीने में भगवान शिव के ‘पंचाक्षर मंत्र’…
खरमास की पूर्व संध्या पर पंचाक्षर मन्त्र जप के महत्व पर विशेष बैठक दिनांक 16 दिसंबर 2025 से खरमास शुरू हो रहा है, जो बुधवार 14 जनवरी 2026 तक चलेगा ! खरमास के महीने में भगवान शिव के ‘पंचाक्षर मंत्र’…

(शोध लेख) भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी चुनाव प्रणाली है, जहाँ वैसे तो तथाकथित तौर पर प्रत्यक्ष रूप से संविधान और तार्किकता को सर्वोच्च माना जाता है। लेकिन सत्ता के गलियारों का एक गहरा, अदृश्य और मनोवैज्ञानिक सच…

एपस्टीन ने कुछ भी नया नहीं किया, अनादि काल से राजाओं और लोकतंत्र के उदय के बाद आज के जमाने के राजा अर्थात नेताओं/अरबपतियों को नियंत्रित करना बच्चों का खेल नहीं है। समकालीन सत्ताओं को अपनी मुट्ठी में रखने के…

एक ही जन्म में लाखों जन्मों को कैसे जियें हमने शास्त्रों में पढ़ा है कि हमारे ऋषि-मुनि, राक्षस-दैत्य, एक जीवन में ही हजारों साल की तपस्या कर लेते थे यह कैसे संभव था, इस विज्ञान पर आज चर्चा करेंगे…

ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ाव समष्टि चेतना में पहले से ही सब कुछ दर्ज है, जिसे “आकाशीय रिकॉर्ड” कहा जाता है ! अध्यात्म मानता है कि हर स्थूल घटना जो दुनिया में घटने वाली है, वह पहले से ही सूक्ष्म जगत…

शुक्राचार्य का ‘असुर दर्शन’ और आधुनिक ‘इल्युमिनाटी’ की कार्यप्रणाली एक ही धुरी पर घूमते हैं ! दोनों ही भौतिक जगत पर अपना पूर्ण और निर्विवाद नियंत्रण चाहते हैं। ‘असुर’ आचार्य शुक्राचार्य का सिद्धांत शुद्ध भौतिकवाद है और आधुनिक ‘इल्युमिनाटी’ की…

अंधभक्त वैष्णव इस लेख से दूर रहें, यह प्रबुद्ध वर्ग के लिये लिखा गया है ! इल्युमिनाटी का अर्थ है “प्रबुद्ध” या “ज्ञानवान”। इसके प्रमुख पर्यायवाची शब्द कुलीन वर्ग, अभिजात वर्ग, श्रेष्ठजन, विद्वान, प्रबुद्धजन हैं। शास्त्रों के अनुसार इल्युमिनाटी समाज…

जीवन के सुख दुःख, समृद्धि आभाव, यश अपयश यह सब आपके मानसिक विचारों की अभिव्यक्ति मात्र है अर्थात आपका मानसिक विचार ही आपका प्रगति पूर्ण संसार है, यही पूंजी है, संसाधन है, न कि कोई बजट और न ही ईट…

शैव-दर्शन का उद्घोष है कि “पशुत्वं त्यक्त्वा पतिर्भवेत्”। अर्थात पहले पशु-भाव छोड़ो, तब शिव-भाव आएगा। मतलाब जिसने संसार में मानवीय गुणों के साथ जीना नहीं सीखा, वह भगवान को भी नहीं पा सकता है। यह पलायन-विरोधी, संसार और जीवन को…

सतयुग में देवताओं और असुरों के बीच लगभग सौ वर्षों तक निरंतर और भयंकर युद्ध चला। यह युद्ध केवल अस्त्र-शस्त्रों का नहीं था, बल्कि सत्ता, संसाधनों और संतुलन के लिए लड़ा गया महा संग्राम था ! जिसने तीनों लोकों की…