सत्ता सदन से नहीं गुफाओं से चलती है

यह बहुत बड़ा भ्रम है कि सत्ता दिल्ली या प्रदेश के सदनों से चलती है, बल्कि बहुत ही नंगा सच यह है कि सत्ता तांत्रिकों के आश्रम या तंत्र की गुप्त गुफाओं से चलती है ! कहने को तो भारत…

यह बहुत बड़ा भ्रम है कि सत्ता दिल्ली या प्रदेश के सदनों से चलती है, बल्कि बहुत ही नंगा सच यह है कि सत्ता तांत्रिकों के आश्रम या तंत्र की गुप्त गुफाओं से चलती है ! कहने को तो भारत…

शोध परक लेख वर्तमान समय में यह एक बहुत ही सामान्य प्रश्न है कि जो संत वास्तव में सिद्ध, पहुंचे हुए और आत्मज्ञानी होते हैं, उनके आश्रमों में अक्सर बहुत कम लोग क्यों दिखाई देते हैं? वहीं, दूसरी ओर जहाँ…

योग्यता को फलित करने की ऊर्जा सफलता क्यों नहीं मिलती? हम सब जीवन में सफल होना चाहते हैं। हम दिन-रात मेहनत भी करते हैं, लेकिन फिर भी कई बार हमें वो सफलता नहीं मिलती जो हम चाहते हैं। इसका कारण…
शोध परक लेख वर्तमान समय में यह एक बहुत ही सामान्य प्रश्न है कि जो संत वास्तव में सिद्ध, पहुंचे हुए और आत्मज्ञानी होते हैं, उनके आश्रमों में अक्सर बहुत कम लोग क्यों दिखाई देते हैं? वहीं, दूसरी ओर जहाँ…

योग्यता को फलित करने की ऊर्जा सफलता क्यों नहीं मिलती? हम सब जीवन में सफल होना चाहते हैं। हम दिन-रात मेहनत भी करते हैं, लेकिन फिर भी कई बार हमें वो सफलता नहीं मिलती जो हम चाहते हैं। इसका कारण…

सभी रहस्यों की चाबी ब्रह्मास्मि क्रिया योग है संसार में सफल होने के लिये भगवान शिव ने अपने प्रिय पार्षदों को अलग अलग समय पर आठ अत्यंत गुप्त विद्याओं का ज्ञान दिया था ! और इन आठों ऊर्जाओं का दुरुपयोग…
1950 से 1970 के दशक के बीच शीत युद्ध की तैय्यारी के दौरान अमेरिका की सी.आई.ए. एजेंसी द्वारा एक बहुत ही कुख्यात ‘माइंड कंट्रोल’ प्रोग्राम’ पर शोध कार्य किया गया ! जिसे अमेरिका के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. इवेन कैमरून ने…

किसी भी सामाजिक या वैचारिक संगठन के लिए उसके विरोधी या शत्रु अनजाने में ही उसकी कीर्ति और यश को बढ़ाने में बहुत बड़े सहायक होते हैं। शत्रुओं द्वारा विरोध की रणनीति, मानव मनोविज्ञान और सामाजिक दर्शन के दृष्टिकोण से…

मानव सभ्यता आज एक अभूतपूर्व और चुनौतीपूर्ण चौराहे पर खड़ी है। आने वाले समय में वे महानगर, जो कभी विकास का प्रतीक माने जाते थे, खाली होने को विवश होंगे। ऊर्जा, सुरक्षित भोजन और रोजगार—जिन तीन मुख्य स्तंभों पर शहरों…

सत्ता प्रतिभावान व्यक्तियों से नहीं उनके स्पष्ट विचारों से डरती है इतिहास गवाह है कि समाज ने हमेशा अपने समय के सबसे प्रखर और प्रतिभावान विचारकों की सदैव हत्या की है ! सुकरात से लेकर ओशो तक, जब भी किसी…