गुरु का अर्थ : Yogesh Mishra
हर व्यक्ति अनादि काल से किसी न किसी योग्य गुरु का शिष्य बनना चाहता है ! पर अब तो उलटी गंगा बह रही है ! अब व्यक्ति शिष्य बनना चाहे या न चाहे गुरु ही यह दावा करते हैं कि…
हर व्यक्ति अनादि काल से किसी न किसी योग्य गुरु का शिष्य बनना चाहता है ! पर अब तो उलटी गंगा बह रही है ! अब व्यक्ति शिष्य बनना चाहे या न चाहे गुरु ही यह दावा करते हैं कि…

क्रोध और आध्यात्मिक व्यक्ति के मध्य चोली दामन का साथ होता है ! अर्थात कहने का तात्पर्य है कि यदि आध्यात्मिक व्यक्ति यदि क्रोधी नहीं है तो इसका तात्पर्य यह है कि उसके आध्यात्मिक व्यक्ति ने अभी पूर्णता को प्राप्त…

निश्चित तौर पर हम यह कह सकते हैं कि भारत के आम आवाम को जानबूझकर गरीब, लाचार, बेसहारा और निर्धन बनाया गया है ! किंतु इसी समाज में कुछ लोग अरबपति भी हो जाते हैं ! आखिरकार वह ऐसा क्या…

हिंदुओं को सदैव से यह शिकायत रही है कि मुसलमानों की जीवन शैली हिंदुओं के एकदम विपरीत है ! इसी आधार पर मुसलमानों ने मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में पाकिस्तान की मांग की थी ! जिसे तत्कालीन अंग्रेज सरकार…

धर्म का निर्माण समाज को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए हुआ था, किन्तु कालांतर में धर्म के मुखिया लोगों की विलासिता को देखकर लोगों ने धर्म की ओट में धन कमाने के निर्णय लिया ! धीरे धीरे समाज का…

आज विश्व में दो तरह के दर्शन विकसित हो रहे हैं ! एक यह मानता है कि ईश्वर के सहयोग के बिना किसी भी तरह का विकास संभव नहीं है ! फिर वह चाहे दैहिक, दैविक, भौतिक किसी भी स्तर…

किसी व्यक्ति की आत्मा का किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करना या करवाना ही ‘पर-काया प्रवेश’ कहलाता है ! इस संबंध में नाथ सम्प्रदाय के आदि गुरु मुनिराज ‘मछन्दरनाथ’ के विषय में कहा जाता है कि उन्हें परकाया…

किस व्यक्ति के लिये भगवान अनुपयोगी है : Yogesh Mishra भारत में वैष्णव प्रपंच के दौरान भक्ति काल में फैलाये गये भ्रम के तहत समाज में यह अवधारणा विकसित हुई कि भगवान की पूजा करने से मनुष्य अपने जीवन…

कालिदास जी पर माता काली की बड़ी विशेष कृपा थी, इसलिए उनका नाम कालिदास पड़ा था ! अर्थात वह स्वयं को माता काली के दास समझा करते थे ! वह मानते थे कि माता काली की कृपा से कुछ भी…

इस सृष्टि में शिव के अतिरिक्त काल से अधिक सामर्थवान कोई भी नहीं है ! काल को जीतना मनुष्य के पुरुषार्थ का विषय ही नहीं है ! फिर वह चाहे भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध, सिकंदर, चाणक्य, सुकरात आदि कोई भी…