विश्व सत्ता के निशाने पर भारत की अगली पीढ़ी : Yogesh Mishra

मेरे पूर्व के कई लेखों को पढ़कर आप लोग यह तो समझ ही चुके होंगे कि भारत इस समय “विश्व सत्ता” के उद्देश्य की पूर्ति के लिये एक भयंकर “जैविक युद्ध” की चपेट में है ! जिस युद्ध को जानबूझकर…
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मेरे पूर्व के कई लेखों को पढ़कर आप लोग यह तो समझ ही चुके होंगे कि भारत इस समय “विश्व सत्ता” के उद्देश्य की पूर्ति के लिये एक भयंकर “जैविक युद्ध” की चपेट में है ! जिस युद्ध को जानबूझकर…

वैसे तो विश्व सत्ता के षड्यंत्र पर मैंने दर्जनों लेख लिखे हैं ! जो आज मेरी वैबसाइट पर मौजूद हैं ! लेकिन आज उनकी कार्य पद्धती पर अपना यह लेख प्रस्तुत कर रहा हूं ! जैसा कि हम सभी जानते…
निसंदेह पूरी दुनिया को पिछले 50 सालों से इंटरनेट के माध्यम से उनके मूल इतिहास से काटकर विश्व सत्ता के नुमाइंदों ने लोगों को बौद्धिक विकलांग बना दिया है ! आज की पीढ़ी के पास न तो सही ऐतिहासिक सूचना…
विश्व के साम्राज्यवादी और पूंजीवादी व्यवस्था ने अपने विश्व सत्ता के उद्देश्य को पाने के लिये पश्चिमी शिक्षा पद्धति के माध्यम से बराबर हमें यह समझाने का प्रयास किया है कि हम और हमारे पूर्वज दोनों ही पूरी तरह से…
ब्रिटेन की एक लैब में दुनिया की निगाह से छुपा कर 6000 से अधिक जानलेवा बैक्टीरिया जिंदा रखे हुये हैं ! यह बैक्टीरिया कांच के जार में बगरू के साथ डालकर ऊपर से पैराफिन की मोटी परत के अन्दर सुरक्षित…

लोगों को यह बहुत बड़ा भ्रम है कि विश्व सत्ता और इल्लुमिनाति एक ही हैं ! जबकि यह गलत है ! “इल्लुमिनाति” एक सिद्धांत विहीन व्यवसायिक संस्था के कई सदस्य समूहों को दिया गया नाम है ! जिसमें कुछ वास्तविक…

क्या आप जानते हैं कि विश्व सत्ता इस दुनिया को कैसे नियंत्रित करती है ! यदि नहीं तो ध्यान से पढ़िये ! हमारे इंटरनेट की दुनिया में 5 लेयर होती है ! पहली लेयर सर्फिंग लेयर कहलाती है ! जिसमें…

भारत के पास ही एक मजबूत आई.टी. पारिस्थितिकी तंत्र है जो किसी भी तकनीक का लोकतंत्रीकरण करने की सभी क्षमताएं रखता है ! क्योंकि विश्व स्तर पर हम एक ऐसे देश के रूप में पहचाने जाते हैं ! जिसके पास…

उस समय राक्षस जैसी कोई प्रजाति नहीं हुआ करती थी ! रावण विद्वान होने के साथ-साथ कूटनीतिज्ञ भी था ! उसने वैष्णव संस्कृत की एक बड़ी कमजोरी पकड़ ली थी ! वह यह थी कि वैष्णव संस्कृति में जब कोई…

रावण एक ऐसा ज्ञानी व्यक्तित्व था ! जिसने स्वयं साक्षात भगवान शिव को प्रसन्न करके उनसे शैव तंत्र विज्ञान की दीक्षा ली थी ! उसी दीक्षा के प्रभाव के कारण उसने अपनी नाभि में अमृत स्थापित कर लिया था और…