क्या फिलॉसफी और दर्शन अलग अलग हैं : Yogesh Mishra

क्या फिलोसोफी दर्शन का अनुवाद है ! ऐसा नहीं है, दोनों अलग अलग हैं ! दुनिया में कोई भी दो शब्द पूरी तरह से एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हो सकते हैं ! दर्शन शब्द भारतीय परंपरा ने गढ़ा है…
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क्या फिलोसोफी दर्शन का अनुवाद है ! ऐसा नहीं है, दोनों अलग अलग हैं ! दुनिया में कोई भी दो शब्द पूरी तरह से एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हो सकते हैं ! दर्शन शब्द भारतीय परंपरा ने गढ़ा है…

एक सूक्ति है “विद्या ददाति विनयम” अर्थात “विद्या से विनय की प्राप्ति होती है ! लेकिन यह सूक्ति गलत है ! विद्या से विनय की प्राप्ति नहीं होती है विद्या से अहंकार की प्राप्ति होती है ! जब व्यक्ति विद्या…

जब हम अपने जीवन की छोटी छोटी खुशियों में बड़े उत्साह के साथ भाग लेते हैं, तो प्रकृति अपने बड़े बड़े खजाने हमारे लिये स्वत: खोल देती है ! तब हमें जीवन में अपार धन, सम्पदा, यश आदि स्वत: प्राप्त…

प्रायः लोग मुझसे यह प्रश्न करते हैं कि जब भारत कितना बड़ा आध्यात्मिक देश था, तो भारत अलग-अलग समय में विभिन्न विधर्मियों के अधीन गुलाम कैसे हो गया ! इस रहस्य को जानने के लिए यह परम आवश्यक है कि…

बड़े-बड़े मनीषी, चिंतक, विचारक, आध्यात्मिक गुरु और समाज के आम लोग जीवन भर यही चिंतन करते रहते हैं कि आखिर जीवन क्या है ? यह एक बहुत गहरा प्रश्न है और व्यक्ति इस प्रश्न का उत्तर इंद्रियों के माध्यम से…

वैसे तो महाभारत के वन पर्व में लोमश ऋषि युधिष्ठिर को अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद की कथा सुनाते हैं ! इसी संवाद को कालांतर में अष्टावक्र गीता के नाम से जाना गया ! जो अद्वैत वेदान्त अर्थात शैव…

राजा जनक ने ब्राह्मण पुत्र अष्टावक्र से आत्मकल्याण के लिये तीन मौलिक प्रश्न किये ! 1. ज्ञान कैसे प्राप्त होता है? 2. मुक्ति कैसे होगी? और 3. वैराग्य कैसे प्राप्त होगा? और यह तीनों प्रश्न ही समस्त अध्यात्म का सार…

“अष्टावक्र गीता” का आरंभ राजा जनक द्वारा पूछे गये तीन प्रश्नों से होता है ! 1. ज्ञान कैसे होता है ? 2. मुक्ति कैसे होती है ? 3. वैराग्य कैसे होता है ? सभी आध्यात्मिक व्यक्तियों के अनादि काल से…

आज मैं अपने परिवार के साथ लखनऊ के सबसे विकसित देवी दुर्गा पूजन के पंडाल पर माता के दर्शन करने गया था ! वहां संयोग से दो दुर्गा के दर्शन हुये ! एक तो देवी मां के रूप में विराजमान…

ईश्वर ने कार्य कारण की व्यवस्था के तहत सृष्टि का निर्माण किया है ! जिसे जीव और प्रकृति मिलकर कार्य कारण की व्यवस्था के तहत चलाते हैं ! इस कार्य कारण की व्यवस्था को न तो देवता बदल सकता है…