लोग अक्सर जिसे “जीवन का संघर्ष” कहकर अपनी निराशा व्यक्त करते हैं, वह वास्तव में समाज द्वारा निर्धारित ढांचे और उसमें जीने की स्वाभाविक शर्तें हैं। जीवन है तो धोखे और धक्के तो लगे ही रहेंगे !
इसे सामाजिक दृष्टिकोण से समझें तो, मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे इसी समाज के ताने-बाने के बीच अपना अस्तित्व बनाए रखना है। यदि वह ताने बाने की शर्तों में जीना नहीं जानता है, तो उसे जीवन का संघर्ष कम करने के लिये उसे सीखना पड़ेगा ! वर्ना वह शिकवे और शिकायत में ही ख़त्म हो जायेगा !
समाज की अपनी कुछ निश्चित अपेक्षाएं, नियम और शर्तें हैं, जैसे शिक्षा प्राप्त करना, आजीविका कमाना, संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना करना, पारिवारिक रिश्ते निभाना और सामाजिक मानदंडों का पालन करना आदि।
समाजशास्त्र में इसे ‘समाजीकरण’ और ‘सामाजिक भूमिकाओं’ का निर्वहन कहा जाता है। यह कोई अलौकिक बाधाएं या किसी के खिलाफ रची गई साजिशें नहीं हैं, बल्कि एक व्यवस्थित मानव समाज के सुचारू संरचना है।
जब हम इन दैनिक सामाजिक प्रक्रियाओं का सामना करते हैं, तो हमारी “योग्यता” सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाती है। यहाँ योग्यता का अर्थ केवल किताबी ज्ञान या धन से नहीं है, बल्कि ‘सामाजिक बुद्धिमत्ता’ अर्थात परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता और व्यावहारिक कौशल से है।
समाज निरंतर गतिशील है और जो व्यक्ति इस गतिशीलता के साथ खुद को बदल सकता है, मात्र वही आसानी से अपना जीवन जी पाता है।
जिस व्यक्ति में इन सामाजिक शर्तों को समझने, समय के साथ नए कौशल सीखने, संवाद करने और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने की क्षमता जितनी कम होगी, उसे समाज के साथ तालमेल बिठाने में उतनी ही अधिक मानसिक और शारीरिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ेगी।
सामाजिक व्यवस्था और व्यक्ति की कमियों के बीच होने वाले इसी घर्षण को व्यक्ति “कठिन जीवन” या “जीवन का संघर्ष” का नाम दे देता है।
निष्कर्ष यह है कि जीवन का संघर्ष कोई थोपी गई व्यक्तिगत सजा नहीं है, बल्कि यह एक निर्विवाद सामाजिक यथार्थ है। जिसके साथ सभी को तालमेल बनाना पड़ता है !
जो व्यक्ति अपनी योग्यताओं को लगातार निखारता है, उसके लिए जीवन की यही सामाजिक शर्तें उसके जीवन यात्रा को सहज और प्रगतिशील यात्रा बन देती हैं; इसके विपरीत योग्यताओं और अनुकूलन क्षमता के अभाव में, जीवन जीने की यही सामान्य प्रक्रिया भी एक पहाड़ जैसा दुर्गम ‘संघर्ष’ लगने लगती है।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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