दरिद्र मानसिकता का व्यक्ति संगठन के लिए क्यों घातक हैं

प्राय: समाज में देखा जाता है कि बड़े-बड़े संगठनों में दरिद्र मानसिकता के लोग संगठन विरोधी कार्यों में लिप्त पाये जाते हैं !

इसका पहला मनोवैज्ञानिक कारण यह है कि दरिद्र व्यक्ति इसलिए दरिद्र होता है क्योंकि वह सामाजिक प्रतिष्पर्धा के अनुरूप बौद्धिक रूप से स्वयं को विकसित नहीं करता है !

दरिद्रता दूसरा कारण यह है कि उसका समाज में मिलना जुलना भी दरिद्र लोगों के साथ ही होता है, इसलिए उन्नतिशील लोगों के विचारों से वह दूर ही रह जाता है, अतः उनका बौद्धिक विकास नहीं हो पता है !

दरिद्रता का तीसरा  कारण यह है कि ऐसे लोग धन के अभाव में देश-विदेश की यात्रा नहीं कर पाते हैं, अतः उनका एक्स्पोज़र कम होता है, जिससे उनमें अनुभव की बहुत कमी होती है ! इस वजह से ऐसे अनुभव हीन व्यक्तियों को कोई भी चालाक व्यक्ति अपने प्रयोजन के लिए आसानी से भटका लेता है और यह व्यक्ति किसी दूसरे के स्वार्थ प्रयोजन के लिये संगठन विरोधी कार्यों में लिप्त हो जाते हैं !

चौथा कारण दरिद्र व्यक्ति अपने दरिद्रता के कारण को समझने के स्थान पर पहले तो वह किसी संपन्न व्यक्ति से अनावश्यक नफ़रत करता है या फिर वह किसी संपन्न व्यक्ति से जुड़कर जल्दी से जल्दी किसी दूसरे की संपत्ति हड़प कर संपन्न होने की इच्छा रखता है ! जिस वजह से वह जीवन भर अपमानित होता रहता है और जीवन भर भटकने के बाद अंत में अपमान के सिवा उसके हाथ और कुछ नहीं लगता है !

अत: व्यक्ति भले ही जन्म से गरीब हो, लेकिन सम्पन्नता के लिये व्यक्ति को बुद्धि से विकसित और स्थिर होना चाहिए तथा उसे प्रयास करना चाहिये कि किसी भी संगठन में प्रतिष्ठित लोगों के साथ मधुर संबंध बना कर अपना विकास क्रमबद्ध विकास करे !

किंतु आत्मविकास की जगह वृत्ति के आवेग में दरिद्र व्यक्ति प्राय: संगठन की हर जगह बुराई करते रहते हैं, इसलिए संगठन के लोग भी धीरे – धीरे उनकी उपेक्षा करना शुरू कर देते हैं और कुछ समय बाद उन्हें अपमानित होकर संगठन छोड़ना पड़ता है !!

इसलिए ऐसे दरिद्र मानसिकता के लोगों के लिये मेरा यह परामर्श है कि उनको सबसे पहले दरिद्र और स्वार्थी मानसिकता के व्यक्तियों से दूरी बना कर रखना चाहिये !

तथा उन्हें संपन्न व्यक्तियों का अनुकरण करके अपने वृत्ति में सुधार करके आत्म कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि आत्म कल्याण के मार्ग से ही उनकी संपन्निता विकसित हो सकती है !!

योगेश कुमार मिश्र

संस्थापक

सनातन ज्ञान पीठ

ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान

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मोबाईल : 9453092553

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