देवी भागवत पुराण के अनुसार वैसे तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन इसी ग्रंथ में बतलाया गया है कि हर साल नवरात्र पर देवी अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं ! देवी के अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आने से देश और जनता पर इसका असर भी अलग-अलग होता है !
देवी भागवत पुराण के अनुसार
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे !
गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता !!
अर्थात सोमवार या रविवार को घट स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं !
शनिवार या मंगलवार को नवरात्रि की शुरुआत होने पर देवी का वाहन घोड़ा माना जाता है !
गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र शुरू होने पर देवी डोली में बैठकर आती हैं !
बुधवार से नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं ! अत: इस अवसर पर वर्षा और गरमी अधिक होती है, जो इस वर्ष देखने को मिल रही हैं !
माता दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं ! यानी जिस दिन नवरात्र का अंतिम दिन होता है, उसी के अनुसार देवी का वाहन भी तय होता है ! देवी भागवत पुराण के अनुसार-
श्लोक
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा !
शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला ! !
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा !
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य कर !!
रविवार या सोमवार को देवी भैंसे की सवारी से जाती हैं तो देश में रोग और शोक बढ़ता है ! शनिवार या मंगलवार को देवी मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जिससे दुख और कष्ट की वृद्धि होती है !
बुधवार या शुक्रवार को देवी हाथी पर जाती हैं ! इससे बारिश ज्यादा होती है !
गुरुवार को मां दुर्गा मनुष्य की सवारी से जाती हैं ! इससे जो सुख और शांति की वृद्धि होती है !
इस बार देवी माँ की विदाई 30 मार्च अर्थात गुरुवार के दिन होगी ! इस लिये यह वर्ष सुख और शांति के लिये वृद्धि कारक होगा !
सरकार की नीतियाँ जनता को राहत देने वाली होंगी !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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