हमारे पूर्वजों ने कभी भी भगवान पर भरोसा नहीं किया और अपने पुरुषार्थ से देश को सोने की चिड़िया बना दिया ! तब देश के सोने की चिड़िया बनने के बाद यूनानी षडयंत्रकारियों ने भारत को कमजोर करने के लिये भारत में भक्ति आन्दोलन की शुरुआत करवाई ! जबकि भक्ति कभी भी धर्म का हिस्सा नहीं रहा है !
और भक्तिकाल के कारण समाज में दो राजकुमारों (भगवान राम और कृष्ण) की कथा तेजी से प्रचलित की गयी और इन दो राजकुमारों को भारत का भाग्य विधाता बना दिया गया !
इन राजकुमारों में से एक ने जीवन से हार मान कर सरजू में जल समाधि ले ली थी और दूसरे का कुलवंश उसी के सामने आपस में झगड़ कर एक दूसरे को ईट पत्थर से कुचल कुचल कर नष्ट कर दिया था और वह भगवान अपने कुल वंश को बचाने के लिये बस चीखते रहा गये थे !
कालांतर में इन राजकुमारों की कथा मंदिर और कथावचन के रूप में व्यावसायिक केंद्र के तरह विकसित हुई ! जिससे धीरे-धीरे समाज का प्रबुद्ध और योद्धा वर्ग इन मंदिरों और कथावाचकों के प्रभाव में अपने पुरुषार्थ को छोड़कर ढोलक मंजीरा पीटने लगा !
यह विदेशी आक्रांताओं के लिए यह सुनहरा अवसर था ! परिणाम यह हुआ कि जब से भारत में भक्ति काल का आंदोलन शुरू हुआ, तब से भारत निरंतर इतना कमजोर होता चला गया कि भारतीयों पर दर्जनों आक्रांताओं ने अलग-अलग समय पर हमला किया और भारत की संपदा को लूटकर वह सरलता से अपने देश वापस चले गये !
और प्रबुद्ध और योद्धा वर्ग मंदिरों में ढोलक मंजीरा पिटता रह गया ! कालांतर में यही आक्रांता बार बार भारत आये और शासन बनाकर बैठ गये !
फिर इन्होंने भारत के धर्म और संस्कृति को ही नष्ट नहीं किया और भारत को लूटा ही नहीं बल्कि भारत की बहू बेटियों को भी लूट कर ले गये और दो – दो दीनार में पूरी दुनिया में जालिमों के हांथ बेच डाला ! कोई भगवान इन बहु बेटियों की रक्षा करने नहीं आया !
इसलिए मेरा कहना यह है कि आपको अपनी रक्षा स्वयं करनी होगी ! यदि आप अपनी रक्षा के प्रति जागरूक नहीं हैं और भगवान भरोसे बैठे हैं तो एक उदाहरण कश्मीर से कश्मीरी पंडितों का पलायन और दूसरा वर्तमान में बांग्लादेश में सरेआम हिंदू बहू बेटियों की लुटती इज्जत आपके सामने स्पष्ट है ! आज भी कोई भगवान इन्हें बचाने नहीं आ रहा है !
इसलिए भगवान का भरोसा छोड़कर आपको अपने पुरुषार्थ के साथ तैयार कीजिये ! आपका पुरुषार्थ ही आपका रक्षक है कोई भगवान नहीं !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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