यह एक ध्रुव सत्य है कि मानव मस्तिष्क से अधिक इस सृष्टि में कुछ भी शक्तिशाली नहीं है ! मानव मस्तिष्क प्रकृति के हर तरह की ऊर्जाओं को संचालित और नियंत्रित करने का सामर्थ्य रखता है !
आज विश्व में जो भी अच्छा या बुरा हो रहा है, वह सब मानव मस्तिष्क के सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा का ही परिणाम है ! जब मानव मस्तिष्क की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में कार्य करती है, तो मानवता का विकास तेजी से होता है और जब मस्तिष्क की ऊर्जा नकारात्मक दिशा में कार्य करती है, तो मानवता का विनाश तेजी से होने लगता है !
अर्थात मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि जहां पर मनुष्य के मस्तिष्क की ऊर्जा सकारात्मक गति से प्रकृति के साथ चलती है, वहां पर मानवता का विकास होता है और जहां पर यह ऊर्जा नकारात्मक गति से प्रकृति के विरुद्ध चलती है, वहां पर मानवता का सर्वनाश होता है !
इसमें कोई संदेह नहीं है कि विश्व सत्ता जो कि दूसरे ग्रहों की अति उन्नत ऊर्जा से संचालित है, वह यह कभी नहीं चाहते कि मानव मस्तिष्क की मानसिक शक्तियों का विकास उनसे तेजी से हो ! इसीलिये उन्होंने हमें मानसिक रूप से विकलांग बनाने के लिए तरह-तरह के अति आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण हमारे समाज में अपने विश्व सत्ता के नुमाइंदों द्वारा टेक्नॉलॉजी के नाम पर प्रस्तुत किये हैं !
और आज हम इसी टेक्नोलॉजी के नाम पर प्रस्तुत उपकरणों की भीड़ में फंसे हुये हैं और इन उपकरणों से उत्पन्न होने वाली नकारात्मक तरंगें निरंतर हमारे मानसिक कार्य क्षमता को क्षति पहुंचा रहीं हैं और अगर 2-3 पीढ़ी तक यही सब चलता रहा तो हमारे आने वाली पीढ़ियां मानसिक रूप से इतना विकलांग हो चुकी होंगी कि तब छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिये अपने जीवित रहने के लिये टेक्नोलॉजी पर आश्रित होना अनिवार्य हो जायेगा !
जैसे उदाहरण के लिए हमारे दो पीढ़ी पहले तक हम सभी के पूर्वज गणित के सवाल अपनी मानसिक शक्तियों द्वारा फटाफट हल कर लिया करते थे लेकिन टेक्नोलॉजी के नाम पर केलकुलेटर के आ जाने के बाद अब हम सामान्य जोड़ घटाना भी केलकुलेटर की मदद से करते हैं और हमारा मस्तिष्क अब इस सहज कार्य को करने में भी अक्षम हो गया है !
ठीक इसी तरह भविष्य में जिस तरह टेक्नोलॉजी का विस्तार हमारे जीवन में होता जा रहा है और हम मानसिक रूप से विकलांग बनते जा रहे हैं ! बहुत जल्दी ही निकट भविष्य में हमारी याददाश्त इतनी कमजोर हो जाएगी कि हमें अपने दैनिक शरीर की आवश्यकताओं के लिए भी टेक्नोलोजी का सहारा लेना पड़ेगा ! जैसे कि हमने आज नहाया या नहीं, मंजन किया या नहीं, भोजन किया या नहीं ! मुझे किस दिन कौन से कपड़े पहनने चाहिये ! कब मेरा ऑफिस खुला है और कब बंद है !
वैसे भी आजकल हम लोग काफी विषयों पर टेक्नॉलॉजी पर इतना आश्रित हो गए हैं कि अपनी मीटिंग और संपर्क करने का समय प्राय: भूल जाते हैं ! जिसके लिए मोबाइल जैसी डिवाइस में उनको अलार्म के रूप में फीड करके रखना पड़ता है ! जिससे समय आने पर हम मीटिंग या अपने व्यवसायिक कार्यो को सुचारू रूप से कर सकें !
यह सब इस बात का संकेत है अब हम मानसिक रूप से विकलांग होना शुरू हो गये हैं ! हमारी मानसिक शक्तियां क्षीर्ण होनी शुरू हो गयी हैं और बहुत जल्द हम निकट भविष्य में इसी तरह मानसिक रूप से और विकलांग होते चले जाएंगे !
हमारे मानसिक ऊर्जा की क्षय गति ही विश्व सत्ता के विजय का हथियार है ! यदि हमें विश्व सत्ता के षड्यंत्र से बचना है तो हमें पुनः अपनी मानसिक शक्तियों को जागृत करने के लिए तकनीकी उपकरणों से दूर होना होगा ! गणित, दर्शन और विज्ञान इन तीनों के मध्य सामंजस्य स्थापित करना होगा !
क्योंकि यह सामंजस्य और संतुलन ही हमें हमारे अस्तित्व की रक्षा कर सकता है अन्यथा विश्व सत्ता की तकनीकी हमें मानसिक रूप से विकलांग बना कर गुलाम बनाने के लिए एकदम तैयार बैठी है !
उनका उद्देश्य यह है कि हमारे मस्तिष्क के अंदर छोटे-छोटे उपकरणों को लगाकर हमें वह नियंत्रित करें और यदि हम नहीं जागे तो हमारा यही भविष्य है ! तब हम इन्सान कहे तो जायेंगे पर हम एक चलता फिरता आंशिक रोबोट से अधिक कुछ नहीं होंगे ! जो किसी और के इच्छा और रहमों करम पर जीवित होंगे !!
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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