जिस तरह पढ़ाई में रुचि न लेने वाले बच्चे प्राय: स्कूल से भाग कर इधर-उधर अपना समय बर्बाद करते हैं या कहिये कि वह समय ही नहीं बल्कि अपना जीवन बर्बाद करते हैं !
ठीक उसी तरह यह संसार जो भगवान शिव का प्रशिक्षण स्थल है, उसमें सांसारिक कार्यों में लिप्त होकर सही तरह से प्रशिक्षण न लेकर जो समर्थवान होते हुए भी ऐसे समय पर अपरिपक्व अवस्था में संन्यास ले लेते हैं, वह अपने जीवन को उसी तरह बर्बाद करते हैं, जैसे स्कूल से भागा हुआ बच्चा अधूरी पढाई छोड़ कर अपने जीवन को बर्बाद कर लेता है ।
इसलिए तथाकथित सभी अपरिपक्व संन्यास लेने वाले साधकों से मेरा अनुरोध है कि वह धर्म के दुकानदारों के चक्कर में न पड़े, बल्कि अपने सांसारिक जीवन में सांसारिक प्रशिक्षण लेते हुए कर्तव्य परायण होकर अपने सांसारिक प्रशिक्षण को पूरा करें !
जब तक आप सांसारिक प्रशिक्षण पूरा नहीं कर लेते, तब तक आपको भगवान भी नहीं मिलेगा और आप आधी अधूरी अपरिपक्वता के कारण अपना जीवन भी नष्ट कर लेंगे ।
इसी को कबीर दास जी ने कहा है “दुविधा में दोनों गये, न माया मिली न राम”
इसलिए संसार और परिवार में सर्वप्रथम अपने कर्तव्य का निर्वहन कीजिये और जब सांसारिक कार्यों में परिपक्व हो जाइये, तब स्वत: ईश्वर की प्रेरणा से आपके अंदर माया के प्रति मोह भंग हो जाएगा ! यही संन्यास की वास्तविक अवस्था है !
इसके पूर्व अपरिपक्व अवस्था में लिया गया संन्यास आपके ही नहीं बल्कि इस संसार के भी सर्वनाश का कारण बनता है ।
जिनके हजारों उदाहरण भगवा कपड़ा पहने हुए तथाकथित संन्यासी अपने कृतियों से रोज समाज में प्रस्तुत कर रहे हैं ।
योगेश कुमार मिश्र
संस्थापक
सनातन ज्ञान पीठ
ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शोध संस्थान
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