भारत में मूल शैव प्रजाति अभी भी है : Yogesh Mishra

वैष्णव आक्रांताओं द्वारा भारत की मूल प्रजाति शैव को पूरी तरह से वैष्णव बनाने के हजारों साल के प्रयास के बाद भी आज भारत में मूल शैव प्रजाति के लोग पाये जाते हैं ! यह लोग प्राकृतिक कच्चे मकानों में…

वैष्णव आक्रांताओं द्वारा भारत की मूल प्रजाति शैव को पूरी तरह से वैष्णव बनाने के हजारों साल के प्रयास के बाद भी आज भारत में मूल शैव प्रजाति के लोग पाये जाते हैं ! यह लोग प्राकृतिक कच्चे मकानों में…

अयोध्या वैष्णव संस्कृति के विरासत की प्रतिष्ठित नगरी रही है ! यही राजा का जन्म स्थान था तथा यह रामराज्य के यथार्थ का केंद्र भी था ! उस समय समस्त विश्व में वैष्णव सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतिष्ठा यहीं से निर्धारित…

इस महाआपदा के काल में हजारों लोग, जिनमें पत्रकार, बुद्धिजीवी, एक्टिविस्ट, राजनेता, साधु-संत, मौलवी, उलेमा, पादरी, किसान, मजदूर, शिक्षक, नौकरशाह आदि सभी शामिल हैं ! अनेक प्रकार से संक्रमित मरीज, उनके परिवार तथा उनसे प्रभावित होने वाले लोगों की जो…

मेरी बात सुनने में आपको अटपटी लग सकती है लेकिन यह सच है कि आज सदियों से जो हम अपने अस्तित्व को बचा कर रख पाये हैं, इसका मूल कारण हमारी आत्म केन्द्रित जीवन शैली ! भारतीय सनातन संस्कृति में…

क्या आप जानते हैं कि भारत में प्रतिवर्ष इतना अनाज पैदा होता है कि भारत यदि चाहे तो पूरी दुनिया के आठ सौ करोड़ लोगों को 6 माह तक अकेले भोजन उपलब्ध करवा सकता है ! लेकिन फिर भी भारत…

सदैव से सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन निरंतर एक वैचारिक क्रम से होता रहा है ! चीजों का विश्लेषण करने की क्षमता एक ईश्वरीय गुण है ! इसे अध्ययन से बढ़ाया तो जा सकता है लेकिन किसी भी विषय के सार…

आपने प्राय: चौराहे पर घोड़े के ऊपर सवार महापुरुषों की मूर्तियों को देखा होगा ! पर क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि उनमें से कुछ घोड़े सामान्य खड़े होते हैं तो कुछ एक पैर उठाकर खड़े…

दिलीप कुमार एक पाकिस्तानी मुस्लमान जिसका वास्तविक नाम मुहम्मद युसुफ खान था ! जिसका जन्म पाकिस्तान के पेशावर में 11 दिसम्बर 1922 को हुआ था ! जिसने फिल्म जगत में नाम बदल कर बेहतर मुसलमान होने का परिचय दिया और…

प्राचीन काल में जब आधुनिक सुविधाएं नहीं थी ! मनुष्य गुफाओं में रहता था और वस्त्र के स्थान पर जानवरों की खाल या पेड़ों के पत्रों का प्रयोग किया करता था ! तभी से मनुष्य के मन में प्राकृतिक घटनाओं…

लोग व्यर्थ ही अपना संपूर्ण जीवन पढ़ने-लिखने में नष्ट कर देते हैं ! अब विज्ञान भी इस बात को मानने के लिए तैयार हो रहा है कि इस ब्रह्मांड में व्याप्त समस्त ज्ञान मानव मस्तिष्क के अंदर पहले से ही…