अल्लोपनिषद् अरब के मय ब्राह्मणों ने लिखा था : Yogesh Mishra

पुरी पीठ के शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी ने अभी हाल में अपना मत दिया है कि अल्ल और अल्ला शब्द कई बार आर्ष आदि ग्रंथों में मिला है ! जिसपर मेरे मन में भी इस विषय पर कुछ विचार…

पुरी पीठ के शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती जी ने अभी हाल में अपना मत दिया है कि अल्ल और अल्ला शब्द कई बार आर्ष आदि ग्रंथों में मिला है ! जिसपर मेरे मन में भी इस विषय पर कुछ विचार…

व्यक्ति सुख, संतुष्टि और आनंद के लिए पूरे जीवन इधर-उधर भटकता रहता है ! कोई धन कमाने में आनंद ढूंढता है, तो कोई शारीरिक वासना की पूर्ति में ! कोई व्यक्ति यश में आनंद ढूंढता है तो कोई भक्ति में…

वैष्णव धर्म ग्रंथों में अग्नि को मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज बतलाया गया है ! जबकि शैव जीवन शैली में अग्नि का कोई महत्व नहीं है ! क्योंकि वह प्रकृति के सहयोगी और उपासक हैं ! मानव में मात्र…

अकबर ने दीने इलाही धर्म चला कर हिंदू के के मन मस्तिष्क पर ही नहीं हिन्दू शहरों पर भी कब्जा कर लिया और हिंदू शहरों के नाम बदलना शुरू कर दिया जैसे अयोध्या का नाम फैजाबाद, प्रयाग का नाम इलाहाबाद,…

यूपी में समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों के 90% मतों को प्राप्त किया ! बहुत से मुसलमान तो विदेशों से लाखों रुपये खर्च करके अपने काम का नुकसान करके मात्र समाजवादी पार्टी को वोट देने के लिये भारत आये ! समाजवादी…

आज भारत के राजनैतिक दलों ने भारत की अनपढ़ जनता को आकर्षित करते हुये. लोकतांत्रिक राजनीति को ऐसी जगह लाकर खड़ा कर दिया गया है कि भारत को अपने सर्वनाश के अतिरिक्त अन्य कोई मार्ग नहीं दिखलाई दे रहा है…

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखिया सर संघचालक मोहन भागवत ने मध्यप्रदेश-यात्रा के दौरान एक बयान द्वारा हिंदुत्व शब्द की परिभाषा को ही बदल दिया है ! वैसे यह वही हैं जो गौ रक्षा और हिन्दू राष्ट्र निर्माण की बात…

आज हिन्दूओं के पास न तो कोई जीवन दर्शन है और न ही कोई सम्प्रभु राष्ट्र ! अपने को विश्व गुरु कहने वाला हिंदू आज पूरी दुनिया में कटोरा लेकर भीख मांगता नजर आता है ! अपने को संयमी कहने…

किसी भी व्यक्ति के जीवन में हार की वजह उसके द्वारा संसार की क्रिया विधि को सही तरह से न समझ पाना ही है ! प्राय: हम लोग यह मानते हैं कि हम संसार की क्रिया विधि को पूरी तरह…

मात्र 31 वर्षीय अथर्व के पुत्र महर्षि दधीचि की हड्डियों वज्र बने के लिये इंद्र महर्षि दधीचि के जीवित ही उनके शरीर से निकल लीं थी ! जिससे उनके उनकी मृत्यु के बाद उनका तपोबल से अर्जित तेज कहीं उनकी…