समाज को प्रश्न विहीन बनाने की गहरी साजिश : Yogesh Mishra
प्रश्न ही समाज की धड़कन है ! जिस समाज में प्रश्न खड़े नहीं होते हैं, वह समाज उस मरे हुए व्यक्ति की तरह है ! जिसकी धड़कन बंद हो चुकी है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो एक संवेदनशील…
प्रश्न ही समाज की धड़कन है ! जिस समाज में प्रश्न खड़े नहीं होते हैं, वह समाज उस मरे हुए व्यक्ति की तरह है ! जिसकी धड़कन बंद हो चुकी है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो एक संवेदनशील…
सूचना है कि सोशल मीडिया के लिये केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन लागू करने के लिये गूगल और फेसबुक जैसी कंपनी तैयार हैं, लेकिन व्हाट्सएप अभी भी पूरी तरह से न मानने के लिये अड़ी हुई है ! दिल्ली हाईकोर्ट…
मोहन भागवत जी द्वारा जो मुसलमान समाज को लेकर हाल ही में बयान दिया गया, उसके उपरांत जो विद्वान जनों की राय सोशल मीडिया पर सामने आई वह भावुकता से भरी हुई तथा एक पक्षीय प्रतीत होती है ! निसंदेह…
‘सत्यमेव जयते’ मूलतः मुण्डक-उपनिषद से लिया गया मंत्र है ! इसका राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार मदन मोहन मालवीय ने उस समय किया था, जब वह अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई “कांग्रेस पार्टी” के सभापति के रूप में अपना दूसरा…
भक्त भी भगवान द्वारा बनाया गया एक नायाव जीव है ! जो भगवान को भी धोखा देकर मोक्ष की कामना करता है ! उसे अगर भगवान स्वयं भी आकर साक्षात् ज्ञान देना चाहें तो भक्त उस ज्ञान की भी छीछालेदर…
‘तत्व’ का शाब्दिक अर्थ है, वास्तविक स्थिति, ययार्थता, वास्तविकता, असलियत ! ‘जगत् का मूल कारण’ भी तत्व कहलाता है, अर्थात तत्व ही है जिससे यथार्थ बना हुआ है ! वैष्णव सांख्य दर्शन के अनुसार 25 तत्व हैं जबकि शैव दर्शन…
भगवान शिव ही शैव तंत्र विज्ञान के अविष्कारक हैं क्योंकि आज विश्व में जो मानव संस्कृति दिखाई दे रही है इसके निर्माता, संरक्षक व निर्देशक भगवान शिव ही हैं ! सतयुग में समस्त सृष्टि पर भगवान शिव का ही एकाधिकार…
सावन में रुद्राभिषेक क्यों अवश्य करना चाहिये वर्तमान भौतिक वैज्ञानिक कहते है कि आज से लगभग 13.7 खरब वर्ष पूर्व एक अत्यंत गर्म और घनी अवस्था से ब्रह्मांड का जन्म हुआ ! उनके अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति किसी एक बिंदु…
तंत्र के माध्यम से ही प्राचीनकाल से घातक किस्म के हथियार बनाए जाते थे ! जैसे पाशुपतास्त्र, नागपाश, ब्रह्मास्त्र आदि आदि ! जिसमें यंत्रों के स्थान पर मानव अंतस चेतना में रहने वाली विद्युत शक्ति का प्रयोग किया जाता था…
शिव पुराण, लिंग पुराण, सहित किसी भी शैव ग्रंथ में ऐसा नहीं लिखा है कि भगवान शिव भांग, गंजा, चरस आदि का सेवन किया करते थे ! किन्तु फिर भी बहुत से लोगों ने भगवान शिव के ऐसे चित्र बना…