Category Adhyatm

Your blog category

काम और यौन-आनन्द में अंतर : Yogesh Mishra

काम और यौन आनंद दोनों अलग अलग विषय हैं किन्तु ज्ञान के अभाव में समाज ने अज्ञानता वश यौन आनंद को ही काम ऊर्जा मान लिया है ! यहीं से सारे विकार और विकृतियां समाज में फैलती चली गई !…

कथावाचक नरक क्यों जाते हैं : Yogesh Mishra

 यह अवधारणा है कि भगवान का नाम लेने से व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है और इस अवधारणा को प्रचारित प्रसारित करने का कार्य कथावाचक करते हैं, किंतु उनके पास मिथ ग्रंथों के अतिरिक्त एक भी ऐसा प्रमाण नहीं…

ओशो के सचिव की कथा : Yogesh Mishra

मां आनंद शीला का असली नाम शीला अंबालाल पटेल है ! मूल रूप से गुजरात के बड़ौदा के कुर्मी समाज से ताल्‍लुक रखती हैं ! 18 साल की उम्र में अमेरिका पढ़ने के लिए गईं ! वहीं पर शादी भी…

ओशो की मृत्यु या हत्या : Yogesh Mishra

 बीसवीं सदी के सबसे बड़े दार्शनिक, विचारक, चिंतक, बुद्धत्व को प्राप्त, गहन मनोचिकित्सक चंद्र मोहन जैन उर्फ़ भगवान रजनीश उर्फ़ ओशो के पुणे स्थित रजनीशपुरम आश्रम एवं उनकी सभी बौद्धिक संपदा के ऊपर अधिकार जमाने हेतु एक बहुत बड़ा विवाद…

एकलव्य का सत्य : Yogesh Mishra

प्राय: सुनने में आता है कि द्रोणाचार्य ने एक गरीब आदिवासी बालक एकलव्य का अंगूठा कटवा लिया था ! इस कथा का प्रयोग फिलहाल राजनीतिक वोट बैंक के लिए ब्राह्मणों के विरुद्ध सर्वाधिक किया जाता है !  अब यहां पर…

एक ही मंत्र काफी है : Yogesh Mishra

 समाज में धर्म की दुकान चलाने वालों तथाकथित संतों ने यह भ्रांति फैला रखी है, कि जीवन में अलग-अलग उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये अलग-अलग मंत्रों की साधना करनी चाहिये !  जबकि यह अवधारणा नितांत अव्यवहारिक, असिद्धांत और मंत्र विज्ञान…

ईसाईयों का छद्म धर्मांतरण वैष्णव की देन है : Yogesh Mishra

 आजकल विशेष रुप से आये दिन यह सूचना प्राप्त होती है कि ईसाई समाज लोगों को मूर्ख बना कर धर्मांतरण करवा रहा है ! कई उदाहरण तो ऐसे भी मिलते हैं कि जिस क्षेत्र में व्यक्तियों की शारीरिक बनावट जिस…

आलोचना और समालोचना में अन्तर

प्राय: आलोचना और समालोचना का अन्तर नहीं जानते हैं  ! और लोग अक्सर ऐसा कहा करते हैं कि अमुक (व्यक्ति, वस्तु या कार्य) की आलोचना मत कीजिए ! ऐसा कहने वाले लोग आलोचना और समालोचना दोनों को एक ही एक…

आयुर्वेद एलोपैथी से क्यों पिछड़ा : Yogesh Mishra

सोलहवीं सदी तक एशिया और यूरोप में चेचक, खसरा या प्लेग (काली मौत) जैसी बीमारियाँ आम हो चुकी थी ! इसकी पहली विस्तृत खेप में बड़ी जनसंख्या खत्म हुई और धीरे धीरे कुछ समय बाद लोगों में इन्हें लेकर प्रतिरोधक…

आधुनिक विज्ञान ही प्रकृति का बलात्कारी है : Yogesh Mishra

 इसमें कोई शक नहीं कि प्रकृति ने मनुष्य को प्रगट ही नहीं किया बल्कि उसे पोषित और उन्नत भी किया है ! यदि प्रकृति का सहयोग न होता तो मनुष्य प्रगट होने के बाद भी कीट पतंगों की तरह जीवन…