वन गमन से चेतना शक्ति का विकास : Yogesh Mishra

आपने बहुत बार यह महसूस किया होगा कि जब आप शहर से दूर कहीं किसी बड़े पार्क में या जंगल की तरफ यात्रा करते हैं, तो आपके अंदर स्वत: ही स्फूर्ति का विकास होने लगता है अर्थात कहने का तात्पर्य…
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आपने बहुत बार यह महसूस किया होगा कि जब आप शहर से दूर कहीं किसी बड़े पार्क में या जंगल की तरफ यात्रा करते हैं, तो आपके अंदर स्वत: ही स्फूर्ति का विकास होने लगता है अर्थात कहने का तात्पर्य…

प्रकृति ने समाज के हर व्यक्ति के लिए हर वस्तु सहज ही उपलब्ध करवाई है ! जिसे दूसरे शब्दों में कहा जाये कि प्रकृति के द्वारा उपलब्ध हर वस्तु पर हर व्यक्ति का समान अधिकार है ! किंतु समाज को…

विशेष : इस लेख को बस सिर्फ शैव विचारक ही पढ़ें ! रावण ने कभी भी धन की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी की आराधना नहीं की ! जबकि लक्ष्मी रावण के परम मित्र दक्षिण भारत के तटीय राजा सागर की…

उस समय 18 वीं शताब्दी में साम्राज्यवादी ताकतों ने पूरी पृथ्वी पर अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए थे ! विश्व के हर देश के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक से अधिक कब्जा करने की होड़ यूरोप के सभी देशों के…

काशी भगवान शिव द्वारा स्थापित अनादि नगरी होने के बाद भी शिव भक्त रावण ने अपने संपूर्ण जीवन काल में कभी भी काशी यात्रा नहीं की ! जबकि वह प्राय: काशी के ऊपर से पुष्पक विमान द्वारा कैलाश पर्वत भगवान…

रामायण या रामचरित मानस के उत्तर कांड के संबंध में बहुत लोगों को इस बात का संशय है कि इसमें घटनाओं का वर्णन एक जैसा नहीं है! शायद इसीलिये शोधकर्ता यह मानते हैं इन दोनों ग्रन्थों में उत्तर कांड को…

भगवान श्री राम न ही इंसान है और न ही भगवान हैं ! भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसे आप इंसान के दृष्टिकोण से देखें तो वह एक मर्यादा पुरुषोत्तम इंसान के रूप में नजर आते हैं…

गांधी की मानें तो युद्ध के दो कारण हैं ! हमारी नफरत और लालच बस ! यही हर युद्ध के मस्तिष्क का आधार है ! गांधी की बात इसलिये भी सही लगती है क्योंकि दुनिया में जो युद्ध हुये वह…

यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम समय में बौद्ध धर्म अपना लिया था ! जबकि सच्चाई यह है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य के दिशा निर्देश में लगभग 24 वर्ष तक शासन करने के…

बंधन का कारण पूंछने पर अष्टावक्र ने अपने पहले प्रवचन में ही राजा जनक से कहा कि “हे राजा आप तो पहले से ही मुक्त हैं ! आपने तो मात्र इस संसार को पकड़ रखा है !” यह एक वाक्य…