वक्त भी एक हथियार ही है : Yogesh Mishra

जिस तरह मनुष्य अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न तरह के हथियारों का प्रयोग करता है ! ठीक उसी तरह ईश्वर भी हमें प्रशिक्षित करने के लिए वक्त को एक हथियार के रूप में प्रयोग करता है ! ईश्वर…
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जिस तरह मनुष्य अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न तरह के हथियारों का प्रयोग करता है ! ठीक उसी तरह ईश्वर भी हमें प्रशिक्षित करने के लिए वक्त को एक हथियार के रूप में प्रयोग करता है ! ईश्वर…

गाँधी जी के एक साथी आचार्य विनोबा भावे जी थे ! जो महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में एक गांव है, गागोदा के रहने वाले थे ! जिन्हें लम्बे समय तक एकांत में रहने के कारण खुद के तत्व ज्ञानी होने…
रासायनिक हथियारों से आशय ऐसे हथियारों से है जिनमें इंसानी शरीर पर हमला करने वाले विषेलै एवं रासायनिक तत्व शामिल होते हैं ! रासायनिक हथियारों की कई श्रेणियां हैं ! कुछ रासायनिक हथियार ऐसे होते हैं जिनमें इंसान का दम…

प्राय: मोटीवेशनल स्पीच सुनता कौन है जो दुनियांदारी से अनभिज्ञ है और मोटीवेशनल स्पीच देता कौन है ? जो खुद कभी किसी धंधे में नहीं रहा है ! अर्थात मोटीवेशनल स्पीच का धंधा ठीक उस धार्मिक वैष्णव कथा वाचन जैसा…

जब कोई शेयर बाजार निरंतर ऊपर की तरफ बढ़ता है, तो उसे बुल अर्थात सॉड बाजार कहा जाता है और जब किसी देश का कोई शेयर बाजार निरंतर नीचे की ओर गिरता है तो उसे बीअर अर्थात भालू बाजार कहा…

डिजिटल इंडिया बनाने वाले पे.टी.एम. के शेयर डाउन हो गये हैं और दूसरी तरफ अडाणी समूह ने गूगल क्लाउड के साथ मल्टी ईयर की साझेदारी कर भारत में गूगल क्लाउड तकनीकी के सहयोग से डिजिटल इंडिया बनाने की मुहिम को…
सभी वैष्णव धर्म शास्त्र कहते हैं कि ईश्वर के भरोसे जीवन नैया सकुशल पार हो जाती है लेकिन व्यवहारिकता की कसौटी पर कसने पर ऐसा पता चलता है कि ईश्वर का भरोसा एक अलग विषय है और संसार का लोक…

भगवान का दर्शन बहुत आसान है, बस व्यक्ति का चित्त कमजोर होना चाहिये ! इसीलिए वैष्णव भक्त लोग लंबे उपवास करके चित्त को कमजोर बना लेते हैं ! जिससे कि वह शास्त्रों के अनुरूप जो भी कल्पना कर चुके हैं…

चित् वह है जो अपने को सब आवरणों से ढककर भी सदा अनावृत बना रहता है, सब परिवर्तनों के भीतर भी सदा परिवर्तनरहित बना रहता है ! उसमें प्रमाता प्रमेय, वेदक वेद्य का द्वैत भाव नहीं रहता, क्योंकि उसके अतिरिक्त…

पश्चिम के विकृत जगत ने पूरी शिद्दत से हमें यह बताने की चेष्टा की है कि बूढ़ा व्यक्ति किसी योग्य नहीं होता है, लेकिन सनातन जीवन शैली में बूढ़े व्यक्ति को परिवार ही नहीं समाज और राष्ट्र का आधार माना…