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शैव कृषि पध्यति और वैष्णव कृषि पध्यति में अंतर जानिए !

कृषि दो तरह की होती है ! एक स्वाभाविक कृषि, दूसरा जिसे मनुष्य उत्पन्न करता है ! जब कृषि स्वाभाविक रूप से होती है अर्थात हवा, जल, वर्षा आदि के प्रवाह से या जीव, जंतुओं के कारण जो वृक्ष स्वाभाविक…

नये नागरिकता बिल की ओट में विदेशी घुसबैथ बढ़ेगा ! जानिए कैसे !

लगता है भारत के राजनीतिज्ञ देश को गुलाम बना कर ही छोड़ेंगे ! वैसे तो भारत के सभी संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिये व्यक्ति का भारत का नागरिक होना आवश्यक है किन्तु किस किस को भारत का नागरिक माना…

लोकतंत्र के रक्षार्थ मिडिया से सावधान अवश्य रहें !

आज भारत का लोक (नागरिक) अपने अधिकांश दैनिक कार्यों के लिये अब स्मार्ट फोन, आई-पैड, आई-पॉड, टैब जैसे संचार उपकरणों पर निर्भर हैं ! क्योंकि वह बाजार में उपलब्ध नए गैजेट्स या नए अनुप्रयोगों के माध्यम से सोशल नेटवर्क पर…

जानिए कैसे राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्ह लोकतंत्र के हत्यारे हैं !

राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के संस्थापक प्रताप चंद्रा कहते हैं कि चुनाव चिन्हों के बल पर चुनाव जीतने का जो अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक चलन रहा है, वह समाप्त हो जाएगा और वही प्रत्याशी जीतेगा जिसका चेहरा उसके क्षेत्र में जनप्रिय होगा…

गाय की उत्पत्ति गोपाष्ठामी पर विशेष लेख अवश्य पढ़ें !

ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार सतयुग में गाय की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के मुख से हुई है ! गाय के गुणों से प्रभावित होकर भगवान ब्रह्मा ने इसे देवताओं को भेंट कर दिया ! किंतु उस काल में निरंतर देवासुर…

जानिए वैष्णव का क्रमिक विकास और पतन !

सतयुग काल में समस्त पृथ्वी पर शैव विचारधारा ही विकसित रूप में थी ! इसी का प्रभाव था कि महर्षि भृगु जैसे ऋषि भी भगवान विष्णु के सीने पर लात मारने का समर्थ रखते थे ! इसी समय अनेकों देव(…

वैष्णव की छल नीति को अपनाया है, ईसाई धर्मांतरणकारियों ने !!

ब्रह्म ज्ञान को पूरी तरह हड़प लेने के बाद वैष्णव ने इस ब्रह्म ज्ञान के सहारे समस्त पृथ्वी पर अपना प्रभाव जमाने की शुरुआत की ! उन्होंने इसके लिये तीन अलग-अलग चरणों में कार्य आरंभ किया ! पहले चरण लोगों…

जानिए पाशुपत शैव साधारण शैवों में क्या अंतर था !

पाशुपत शैव साधारण शैवों से भिन्न थे ! प्राचीन काल में मूल शैव सम्प्रदाय पाशुपत सम्प्रदाय कहलाता था ! वे शिव को ही कर्ता- धर्ता समझते थे ! इस मत के मानने वाले शिव को पति मानते थे और जीव…

वैष्णव देवी स्थल पर लाल चुनरी क्यों चढ़ती है ?

लाल रंग सुहागिनों का रंग है ! देवी पुराण के अनुसार जितनी भी वैष्णव देवी हैं उन्हें लाल बहुत पसंद है और वैष्णव देवताओं को पीले रंग के वस्त्र बहुत पसंद हैं ! अत: मां को प्रसन्न करने के लिये…

जानिए शैव और वैष्णव सम्प्रदाय की उत्पत्ति कैसे हुई !

वैदिककाल में देव और असुरों के झगड़े के चलते धरती के अधिकतर मानव समूह दो भागों में बंट गए ! हजारों वर्षों तक इनके झगड़े के चलते ही पहले सुर और असुर नाम की दो धाराओं का धर्म प्रकट हुआ,…