राष्ट्र में ब्राह्मण नहीं तो कुछ भी नहीं बचेगा : Yogesh Mishra

भारत का मनुष्य अपनी असफलता और बुराई का दोष भाग्य और ईश्वर को देता है समाज की बुराई का श्रेय ब्राह्मण को जाता है ! आज जो पुत्र पैदा हुआ, जो नौकरी मिली, जिसको लोग कहते है ईश्वर कि कृपा,…

भारत का मनुष्य अपनी असफलता और बुराई का दोष भाग्य और ईश्वर को देता है समाज की बुराई का श्रेय ब्राह्मण को जाता है ! आज जो पुत्र पैदा हुआ, जो नौकरी मिली, जिसको लोग कहते है ईश्वर कि कृपा,…

सवर्णों में एक जाति ब्राह्मण है ! जिस पर सदियों से राक्षस, पिशाच, दैत्य, दानव, यवन, मुगल, अंग्रेज, कांग्रेस, सपा, बसपा, वामपंथी, भाजपा, सभी राजनीतिक पार्टियाँ और आधुनिक कानूनों के ओट में हरिजन एक्ट और आरक्षण के नाम पर विभिन्न…

प्रकृति की व्यवस्था यदि पूर्वाग्रही होकर देखा जाये तो अत्यंत जटिल है ! अन्यथा तटस्थ भाव से यदि प्रकृति को समझने की चेष्टा की जाये ! तो प्रकृति अपने रहस्य स्वयं ही खोलने लगती है ! प्रकृति बहुत ही व्यवस्थित…

‘यथा ब्रह्माण्डे तथा पिण्डे’ -चरक संहिता का यह श्लोकांश हमें समझाता है कि जो-जो इस ब्रह्माण्ड में है वही सब हमारे शरीर में भी है ! यह भौतिक संसार पंचमहाभूतों से बना है ! आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी…

“म्लेच्छ” शब्द का अर्थ है वह व्यक्ति जिसकी इच्छा मल की तरह दूषित हो अर्थात सामाजिक व्यवस्था के विपरीत मल के समान दूषित इच्छा प्रगट करने वाला व्यक्ति “म्लेच्छ” है ! जैसे परस्त्री या कन्या के भोग की इच्छा या…

लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद 1966 में इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बने रहने के लिये वामपंथियों की मदद चाहिये थी ! समझौता हुआ कि आप प्रधानमंत्री बनी रहो पर हमें देश की शिक्षा व्यवस्था दे दो ! अत: कट्टर…

संस्कृत में “अछूत” को “अस्पृश्य” कहते हैं ! किसी भी वैदिक ग्रन्थ में “अस्पृश्य” शब्द का उल्लेख तक नहीं है ! “वैदिक ग्रन्थ” से तात्पर्य है वैदिक संहिताएं ! ब्राह्मण-ग्रन्थ ! आरण्यक ! उपनिषद ! समस्त वेदाङ्ग साहित्य जिसमें गृह्य-सूत्र…

इराक का एक पुस्तक है जिसे इराकी सरकार ने खुद छपवाया था ! इस किताब में 622 ई से पहले के अरब जगत का जिक्र है ! आपको बता दें कि इस्लाम धर्म की स्थापना इसी साल हुई थी !…

मत्स्य पुराण में वर्णन है कि जब प्रलय आता है ! युग का अंत होता है ! पृथ्वी जलमग्न हो जाती है और सब कुछ डूब जाता है ! उस समय भी चार वटवृक्ष नहीं डूबते हैं ! उनमें सबसे…

कुमारिल भट्ट का जन्म जयमंगल नामक गाँव में पं. यज्ञेश्वर भट्ट तथा माता चंद्र्कना ( यजुर्वेदी ब्राह्मण) के यहाँ हुआ था ! बालक ने योग्य गुरु के यहाँ वेद , वेदांग तथा अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया था ! उनकी…