वैष्णव शास्त्रों में देवताओं का मानवीकरण : Yogesh Mishra

वैदिक युग से लेकर कृष्ण काल तक रामायण और महाभारत इन दो ग्रंथों के भीतर वेदों के विरुद्ध वैष्णव लेखकों ने राम और कृष्ण को ईश्वर से ऊपर प्रस्तुत किया है ! जब कि सनातन शैव चिंतन में मिथक या…

वैदिक युग से लेकर कृष्ण काल तक रामायण और महाभारत इन दो ग्रंथों के भीतर वेदों के विरुद्ध वैष्णव लेखकों ने राम और कृष्ण को ईश्वर से ऊपर प्रस्तुत किया है ! जब कि सनातन शैव चिंतन में मिथक या…

शास्त्र पढ़ने के कई कारण होते हैं ! कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन अपना समय पास करने के लिये करते हैं ! तो कुछ लोग अपने बौद्धिक मनोरंजन के लिये भी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं ! कुछ लोग ईश्वर…
शास्त्र पढ़ने के कई कारण होते हैं ! कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन अपना समय पास करने के लिये करते हैं ! तो कुछ लोग अपने बौद्धिक मनोरंजन के लिये भी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं ! कुछ लोग ईश्वर…

यह जीव विज्ञान का बहुत ही सामान्य सा सिद्धांत है कि जो व्यक्ति जिस परिवेश में रहता है या जो भोजन करता है ! शरीर उसी के अनुरूप अपना विकास कर लेता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो…

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं अर्जुन को उपदेश देते हुये कहा है कि तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ! उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिन: !! अध्याय 4, श्लोक 34 ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ, उनको भलीभाँति…

उस समय गोस्वामी तुलसीदास को अयोध्या के पंडों ने अयोध्या से अपमानित करके भगा दिया था ! तब गोस्वामी तुलसीदास बनारस में काशी नरेश के दरबार में उपस्थित हुये और उनसे आग्रह किया कि “मैं भगवान श्रीराम पर एक ग्रंथ…

मन अति चञ्चल बलवान् मथ डालने वाला है ! उसे रोकना वायु को रोकने की भाँति बहुत कठिन है ! ऐसा अर्जुन ने श्रीभगवान् से कहा ! श्री भगवान् ने भी बिना किसी विरोध के ही इस बात को स्वीकार…

व्यवहार में मन, बुद्धि और चित्त का एक सा ही अर्थ बतला देते हैं ! किन्तु ध्यान से देखें तो इन सब में बहुत बड़ा भेद है ! प्रपञ्चसार तन्त्र के अनुसार मन, इंद्रियों की तन्मात्रा के द्वारा विषयों को…

परस्पर संवाद की अपनी एक ऊर्जा होती है ! संवाद ही वह शक्ति है जो समाज के हर वर्ग को एक दूसरे से जोड़े रखती है ! जिस समाज में संवाद खत्म हो जाता है ! उस समाज में अपराध…

विचार कीजिये कि हम अपने जीवन में कितने तरह के युद्ध लड़ते हैं ! युद्ध का तात्पर्य बस यह नहीं है कि देश की सीमा पर जाकर ही लड़ा जाये ! हम समाज और धर्म के हितार्थ जब किसी भी…