विज्ञान की द्रष्टि में भैरव तंत्र : Yogesh Mishra

विज्ञान का अर्थ है चेतना ! भैरव का अर्थ वह अवस्था है ! जो चेतना से भी परे है और तंत्र का अर्थ विधि है ! चेतना के पार जाने की विधि ! हम मूर्छित हैं ! अचेतन हैं !…

विज्ञान का अर्थ है चेतना ! भैरव का अर्थ वह अवस्था है ! जो चेतना से भी परे है और तंत्र का अर्थ विधि है ! चेतना के पार जाने की विधि ! हम मूर्छित हैं ! अचेतन हैं !…

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोई भी राष्ट्र नागरिकों के समूह से बनता है और यदि नागरिकों का समूह अशिक्षित और जाहिल होता है तो उस राष्ट्र का विकास हो पाना असंभव होता है ! इसके अतिरिक्त दूसरी…

सनातन जीवन शैली में व्यक्ति भगवान को प्रसाद लगा कर ही उसी प्रसाद का भोजन करता था ! इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि व्यक्ति शुद्धता के साथ भोजन बनता था और वही खाता था जो भगवान को खिलाया…

जो लोग राजनीति की समझ नहीं रखते वह आपातकाल की सौ कमियां गिना देंगे ! लेकिन आपने कभी विचार किया कि आपातकाल के 19 महीनों में देश में जो हुआ ! क्या उसकी वास्तव में आवश्यकता देश को नहीं थी…

जैसा कि रामायण में नहीं बल्कि रामचरितमानस में लिखा है कि शिव भक्त राजा जनक ने सीता स्वयंवर में यह शर्त रखी थी कि जो व्यक्ति शिव धनुष पिनाक की प्रत्यंचा चढ़ा देगा ! उसी से वह सीता का विवाह…

हमारा देश अप्रतिम विचित्रताओं, एक से एक महान उपलब्धियों जिन पर किसी को भी विश्वास करना इतना आसान नहीं, ऐसी अनोखी दास्तानों, खोजों, दुर्लभ सम्पदाओं, विलक्षण प्रतिभाओं और अमूल्य धरोहरों से भरा पड़ा है ! भारत अद्भुद विद्वानों का देश…

प्रायः लोग अंधभक्त और चमचे को एक ही मान लेते हैं ! लेकिन यह गलत है ! दोनों में ही गुणधर्म, प्रवृत्ति, आचार-विचार और उद्देश्यों के अनुरूप बहुत अंतर होता है ! चमचा वह नायाब जीव है ! जो अपने…

मेरी एक शिष्य का आग्रह आया है कि मैं “नवार्ण मंत्र” की शक्ति और लाभ” के विषय में लेख प्रस्तुत करूँ ! अतः में निम्नलिखित लेख प्रस्तुत कर रहा हूं ! ऋग्वेद में आदिशक्ति का कथन है- ‘मैं ही निखिल…

अभी कुछ दिन पहले मैंने एक कमेंट डाला था कि महापंडित रावण में अपने जीवन काल में 2700 से अधिक विभिन्न तरह के विभिन्न ग्रंथों का निर्माण किया था ! जिस पर मेरे कुछ साथियों ने यह आग्रह किया कि…

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण पर आरोप है कि उसने कुबेर के पुत्र नल कुबेर की होने वाली पत्नी रम्भा का बलात्कार किया था ! जिसे रामायण में इस प्रकार लिखा गया है ! “एवमुक्त्वा स तां रक्षो निवेश्य च…