सनातन धर्म के रक्षार्थ विलुप्त होती ज्योतिष विद्या को पुनर्जीवित करना होगा ! Yogesh Mishra

सृष्टि का गतिचक्र एक सुनियोजित विधि-व्यवस्था के आधार पर चल रहा है। ब्रह्माण्ड अवस्थित विभिन्न नीहारिकाएं-गृह, नक्षत्रादि परस्पर सहकार सन्तुलन के सहारे निरन्तर परिभ्रमण-विचरण करते रहते हैं। जिस ब्रह्माण्ड में मनुष्य रहता है उसकी अपनी परिधि एक लाख प्रकाश वर्ष…









