इन निर्दोष बच्चों को कौन बचाएगा ? : Yogesh Mishra

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15,000 बच्चे जो स्नातक की परीक्षा दे रहे हैं या दे चुके हैं वह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पास न हो पाने के कारण आत्महत्या कर लेते हैं ! इसको सामान्य गणित के अनुसार देखा…

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 15,000 बच्चे जो स्नातक की परीक्षा दे रहे हैं या दे चुके हैं वह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पास न हो पाने के कारण आत्महत्या कर लेते हैं ! इसको सामान्य गणित के अनुसार देखा…

वैसे कहने को तो धर्म स्थितप्रज्ञ होता है ! यह किसी भी देश, काल, परिस्थिति में अपने अस्तित्व को क्षीर्ण नहीं करता है ! धर्म समाज को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए निरंतर प्रवाहित होने वाली ईश्वरीय व्यवस्था का…

दुनिया के सभी आर्थिक संस्थान आपके मेहनत की जमा पूंजी को आपसे छिनने के लिये विधि द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान हैं ! जिनका एक मात्र उद्देश्य आपकी मेहनत की कमाई को विधि द्वारा स्थापित व्यवस्था के तहत छीनना है !…

आज विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां ही नहीं बल्कि विश्व के 17 देश भी आर्थिक कंगाली के स्तर पर आकर खड़े हो गए हैं ! फिर वह चाहे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजॉन, एप्पल जैसे प्रतिष्ठित विश्व व्यापी कंपनियां हो या फिर स्वयं…
यदि आप लंबे समय से निरंतर तनाव में हैं ! आपका जीवन अस्त व्यस्त हो गया है या आप महसूस करते हैं कि आप अवसाद में हैं ! आप निरंतर ब्लड प्रेशर, थायराइड, डिप्रेशन आदि की दवाइयां भी लेते हैं,…

( अंधभक्त इसे न पढ़ें ) भारतीयों को गुमराह करने के लिये इन्दिरा गांधी और नेहरू को पानी पी पी कर कोसने वाले अंधभक्त और 10 सालों से फर्जी आंकडे के सहारे विकास का दम भरने वाले नेताओं की वजह…

मनुष्य के जीवन में सभी संघर्ष इसलिए होते हैं कि मनुष्य अपने प्रवृत्ति की प्रवाह के आवेग में, प्रकृति के प्रवाह को समझने में असमर्थ हो जाता है ! इसी कारण मनुष्य किसी और से नहीं बल्कि अपने प्रवृत्ति के…

प्रायः लोग पूछते हैं कि हम अपना आत्म उत्थान कैसे करें, इसके लिए हमें क्या करना होगा ? आज इस विषय पर चर्चा करता हूं ! अपना आत्म उत्थान करने के लिए सबसे पहले तो आप मेरे होने वाले प्रवचनों…

मनुष्य प्रकृति से उत्पन्न एक प्राकृतिक जीव है ! प्रकृति ने इस मनुष्य की रक्षा लाखों वर्ष तक की है ! तभी आज हम इस पृथ्वी पर मौजूद हैं ! किंतु बाजारवाद के चलते अब हमने स्वयं को प्रकृति से…

आज यह चिंतन का विषय है कि “आदिपुरुष” जैसे फिल्मों से किन लोगों का अस्तित्व खतरे में आ गया है ! इसका यदि वर्गीकरण किया जाये, तो सबसे पहला नाम उन वैष्णव भक्तों का आता है, जिन्होंने महर्षि वाल्मीकि की…