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संपन्नता का महाविज्ञान

विशेष सत्र संपन्न होना एक कला है ! जो लोग संपन्न होने की युक्ति को नहीं जानते हैं, वह निश्चित रूप से योग्य और शिक्षित होने के बाद भी परिश्रम करके गरीबी ही रह जाते हैं !  अर्थात मेरे कहने…

शैव और वैष्णव योगी में अंतर : Yogesh Mishra

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद भगवत गीता के छंठे अध्याय के अठारहवे श्लोक में कहा है कि – यदा विनियतं चित्तमात्मन्येवावतिष्ठते !! निःस्पृहः सर्वकामेभ्यो युक्त इत्युच्यते तदा॥ 6/18 अर्थात्- जब (यदा), विशेष रूप से संयत किया हुआ (विनियतं), चित्त (चित्तम्),…

शिव सहस्त्रार वेबनार में आपका स्वागत है : Yogesh Mishra

भगवान शिव द्वारा रावण को परा-अपरा विद्या के सत्य के रहस्य को बतलाने के लिये जो सूत्र स्वयं दिये गये थे ! जिनसे वैष्णव लेखकों ने 100 से अधिक ग्रंथों का निर्माण किया है ! उन्हीं सूत्रों की व्याख्या पर…

शिव सहस्त्रार ज्ञान पर विशेष सत्र : Yogesh Mishra

 शैव जीवन शैली में मुक्ति की प्राप्ति के लिये भगवान शिव द्वारा रावण को जो तत्वज्ञान दिया गया था, जिससे रावण प्रकांड ब्राह्मण ही नहीं बना बल्कि उसने परम मुक्ति की अवस्था में अमृत्व को भी प्राप्त कर लिया था…

शिव सहस्त्रार ज्ञान साधना ही सर्वश्रेष्ठ है : Yogesh Mishra

शिव सहस्त्रार ज्ञान साधना स्वयं में संपूर्ण साधना है ! इस साधना को करने वाले मानव साधक को अपने कल्याण के लिये किसी भी अन्य सहयोगी साधना पद्धति की आवश्यकता नहीं है !  यह ज्ञान परंपरा मनुष्य का कल्याण इस…

शिव सहस्त्रार ज्ञान क्या है : Yogesh Mishra

आत्म कल्याण की इच्छा से अपने पितामह ब्रह्मा जी का अनन्य तप करने के बाद भी जब रावण को वेदों का ज्ञान तो प्राप्त हो गया किन्तु आत्म संतुष्टि नहीं हुई ! तब रावण ने भगवान शिव की आराधना करने…

शिव सहस्त्रार ग्रन्थ का महत्व : Yogesh Mishra

शिव सहस्त्रार एक तमिल भाषा में श्रुति और स्मृति के आधार पर संग्रहित किया गया ऐसा ग्रंथ है, जो राम रावण युद्ध के बाद विलुप्त हो गया ! लेकिन इसका बहुत बड़ा अंश तमिल लोकगीतों में बहुत समय तक चर्चा…

शिक्षित गरीबी से कैसे निपटें : Yogesh Mishra

 अंग्रेजों द्वारा स्थापित किये गये स्कूलों का एक मात्र उद्देश्य था कि अंग्रेज सरकार के लिए बौद्धिक मजदूर पैदा करना ! जिनसे अंग्रेज कानून, तकनीक, प्रशासन सेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में अपने लाभ के लिये कार्य ले सकें !…

शिक्षा ही हमारे विनाश का कारण है : Yogesh Mishra

मनोवैज्ञानिकों की अवधारणा है कि कोई भी व्यक्ति यदि निरंतर एक ही समय पर 40 दिन तक कोई भी क्रिया करता है, तो उस मनुष्य के अंदर उस क्रिया को निरंतर करते रहने का अभ्यास हो जाता है ! जिसे…

वैष्णव भक्ति अधूरी है : Yogesh Mishra

 आपरिपक्व वैष्णव लेखकों का मत है कि कलयुग में व्यक्ति की बुद्धि और सामर्थ्य कम हो जाने के कारण व्यक्ति मात्र भक्ति के द्वारा ही ईश्वर को प्राप्त कर सकता है ! यह दर्शन या विचारधारा पूरी तरह से अपूर्ण…