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मित्रता का मनोविज्ञान : Yogesh Mishra

मित्रता का तात्पर्य किसी से मात्र भावनात्मक या पारस्परिक लगाव नहीं है ! बल्कि मित्र उसे कहा जा सकता है जो आपके बौद्धिक और चेतना के स्तर को विकसित करने में सहायक हो ! आर्थिक मदद के लिये की गई…

मानवीय संस्कृति का आधार कैलाश पर्वत है   : Yogesh Mishra

मानवता के इतिहास की शुरुआत बन्दर से नहीं बल्कि कैलाश पर्वत से होती है ! जो कि शैवों का पवित्र स्थल है ! कैलाश पर्वत का ग्लेशियर ही एशिया में अनादि काल से सभी महत्वपूर्ण नदियों का स्रोत रहा है…

मात्र संस्कृत भाषा हिंदुत्व का आधार नहीं है : Yogesh Mishra

यह एक चिंतन का विषय है कि भारत अनादि काल से विभिन्न भाषा और संस्कृतियों का देश रहा है ! फिर भी सभी धर्म ग्रंथ संस्कृत भाषा में ही क्यों मिलते हैं ? जबकि भारत के संदर्भ में तो यह…

मर्डर ऑफ गॉड : Yogesh Mishra

 भारतीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया जो कि एक प्रबल दार्शनिक ही नहीं, अच्छे चिंतक और विचारक भी हैं ! इन्होंने यह निष्कर्ष निकाला है कि हिंदू समाज के विनाश का कारण हिंदुओं के अवतारवाद की अवधारणा है !  ऐसा ही…

मनुष्य मृत्युंजयी कैसे बनता है : Yogesh Mishra

सनातन शैव संस्कृति अनादि है, अनंत है और काल से परे है ! क्योंकि इस संस्कृति के संस्थापक भगवान शिव ने स्वयं की है ! जो स्वयं काल से परे हैं ! भगवान शिव का कभी जन्म नहीं हुआ है…

भारतीयों के दरिद्रता का माइंड सेट : Yogesh Mishra

 यह भारतीयों का दुर्भाग्य रहा है कि भारत के प्राकृतिक रूप से संसाधन संपन्न होने के बाद भी भारतीय लोग स्व प्रेरणा से अपने को कभी संपन्न नहीं बना चाहे हैं ! कुछ दूरदर्शी राजाओं के शासनकाल को यदि छोड़…

भारतीय शास्त्रीय संगीत से चिकित्सा : Yogesh Mishra

भारतीय शास्त्रीय संगीत पूर्णतया वैज्ञानिक है ! हमारे ऋषियों, मुनियों, मनीषियों, चिंतकों ने मानव चित्त, मन, बुद्धि, संस्कार और अहंकार पर गहन शोध करने के बाद, उनका ध्वनि से संबंध स्थापित किया और यह निष्कर्ष निकाला कि विभिन्न तरह की…

भारत के सर्वनाश की नई दास्तान : Yogesh Mishra

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं कि जिनका काम ही दूसरों की आलोचना करना होता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाए कि चाहे कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो, उद्योगपति हो, धार्मिक व्यक्ति हो, या अपने जीवन निर्वाह के लिए…

भारत के सर्वनाश का कारण और निवारण : Yogesh Mishra

जब किसी भी समाज में धन और सुविधाएं मनुष्य के ज्ञान और विवेक से अधिक हो जाती हैं, तो वह समाज विकृति की ओर बढ़ने लगता है ! भारतीय समाज ने भी यह दौर देखा है ! चोल वंश के…

क्या श्रीमद् भगवद गीता आपके चेतना के स्तर को गिराती है : Yogesh Mishra

जैसा कि मैंने अपनी पूर्व के अनेक लेखों में लिखा है कि वर्तमान में प्रचालन में श्रीमद्भगवद्गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिये गये उपदेश से अलग है ! आज प्रचालन में यह ईसाइयों द्वारा लिखवाई गई गीता है…