क्या भगवान भी एक व्यवसायिक आधार है : Yogesh Mishra

भगवान के नाम पर होने वाले 6000 करोड़ से अधिक के व्यवसाय का परिचय बतलाने की जरूरत आज किसी को नहीं है ! भारत के अंदर 12 लाख से अधिक छोटे-बड़े मंदिर, गांव गांव में भगवा लपेटकर और टीका लगाकर…

भगवान के नाम पर होने वाले 6000 करोड़ से अधिक के व्यवसाय का परिचय बतलाने की जरूरत आज किसी को नहीं है ! भारत के अंदर 12 लाख से अधिक छोटे-बड़े मंदिर, गांव गांव में भगवा लपेटकर और टीका लगाकर…

प्रायः यह अवधारणा है कि जो व्यक्ति भक्त होता है वह धार्मिक भी होता है लेकिन यह अवधारणा अनादि काल से अस्वीकार्य है क्योंकि प्राचीन काल में भी यह माना गया कि जिस व्यक्ति ने धर्म के लक्षणों को स्वीकार…

आजकल हिंदू धर्म और ब्राह्मणों को पानी पी पी कर गाली देने का एक प्रचलन सा शुरू हो गया है ! इसके पीछे विदेशी इसाई संस्थाओं और बौद्ध षड्यंत्रकारियों का स्पष्ट हाथ है ! प्रशासनिक सेवाओं की कोचिंग पढ़ाने…

जैसा कि मैंने पूर्व के अपने एक लेख में बतलाया कि बौद्ध धर्म को लेकर आज तक कभी नहीं इतिहास में कोई प्रमाणिक ग्रंथ नहीं मिला है ! जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि बौद्ध धर्म के संस्थापक…

आज दुनिया का कोई भी अर्थशास्त्री आपको यह नहीं बतलायेगा कि बेरोजगारी एक भ्रम है ! जिसे जानबूझकर समाज में फैलाया गया है ! इसके पीछे संपन्न लोगों का उद्देश्य अपनी प्रतिस्पर्धा समाप्त करना है ! इसीलिए हमें दुनिया के…

यह भारत का इतिहास रहा है कि जब भी कोई सनातन धर्म की रक्षा के लिए कोई भी प्रभावशाली कदम उठाता है उसे वैश्विक षड्यंत्रकारी किसी न किसी महान संकट में जरूर डाल देते हैं ! फिर वह चाहे आसाराम…

एक्टोलाइफ प्रजनन कम्पनी कृतिम पध्यति से प्रति वर्ष 30,000 मन चाहे बच्चे पैदा कर सकती है ! इस समय कंपनी के पास 75 लैब हैं जिन्हें जल्द ही 200 से अधिक बना लिया जायेगा ! इस पूरे कॉन्सेप्ट की शुरुआत…

यदि प्रकृति को परिभाषित करना हो तो एक लाइन में कहा जा सकता है कि पंचतत्व का प्रगट स्वरूप ही प्रकृति है ! अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये कि प्रकृति में जो भी प्रगट स्वरूप इंद्रियों से अनुभूत हो…

हिंदू धर्म में बहुत से ऐसे शब्द हैं, जिनके विषय में हिंदू यह मानकर चलता है कि यह अंतिम निष्कर्ष का शब्द है ! अब इसमें किसी भी पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है ! जैसे सत्य, तप, त्याग, प्रारब्ध, सुर,…

ध्यान के दो अर्थ होते हैं ! सामान्य प्रचलित भाषा में किसी विषय, वस्तु, व्यक्ति, उद्देश्य पर मन और भाव को केन्द्रित करना ध्यान है ! जिसे हम त्राटक के नाम से भी जानते हैं ! वैष्णव जीवन शैली में…