yogeshmishralaw

yogeshmishralaw

राम को इंसान से भगवान बनाने की कोशिश : Yogesh Mishra

भगवान श्री राम न ही इंसान है और न ही भगवान हैं ! भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसे आप इंसान के दृष्टिकोण से देखें तो वह एक मर्यादा पुरुषोत्तम इंसान के रूप में नजर आते हैं…

युद्ध का मनोविज्ञान : Yogesh Mishra

गांधी की मानें तो युद्ध के दो कारण हैं ! हमारी नफरत और लालच बस ! यही हर युद्ध के मस्तिष्क का आधार है ! गांधी की बात इसलिये भी सही लगती है क्योंकि दुनिया में जो युद्ध हुये वह…

मौर्यवंशी शासक सनातन धर्म विरोधी थे : Yogesh Mishra

यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने अंतिम समय में बौद्ध धर्म अपना लिया था ! जबकि सच्चाई यह है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य के दिशा निर्देश में लगभग 24 वर्ष तक शासन करने के…

मोक्ष्य का वास्तविक मार्ग : Yogesh Mishra

बंधन का कारण पूंछने पर अष्टावक्र ने अपने पहले प्रवचन में ही राजा जनक से कहा कि “हे राजा आप तो पहले से ही मुक्त हैं ! आपने तो मात्र इस संसार को पकड़ रखा है !” यह एक वाक्य…

मैकाले का भारतीय शिक्षा नीति के विनाश से कोई सम्बन्ध नहीं है : Yogesh Mishra

भारतीय शिक्षा नीति का नाम लेते ही लोग राजीव दीक्षित के प्रभावों में मैकाले को गाली देना शुरू कर देते हैं !  किंतु गाली देने वालों में से कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जिसने कभी भी भारत के शिक्षा…

माया भ्रम नहीं अनुभूति का विषय है : Yogesh Mishra

किसी भी तथ्य या पदार्थ पर हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया उसके संस्कार और बुद्धि के अनुसार अलग-अलग होती है ! अनुभूति के क्षेत्र में इस अलग-अलग प्रतिक्रिया को अलग-अलग अनुभूति भी कहा जाता है ! अर्थात कहने का तात्पर्य यह…

मांसाहारी भोजन क्यों नहीं करना चाहिए : Yogesh Mishra

 जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर शरीर के अंदर एक विशेष तरह का डी.एन.ए. अर्थात डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल होता है ! जो प्रत्येक व्यक्ति की अनुवांशिक विशेषज्ञता को बतलाता है ! इसी से हमारे चेतना के स्तर का…

महाभारत धर्म युद्ध नहीं बल्कि पारिवारिक युद्ध था : Yogesh Mishra

यह एक बहुत बड़ी भ्रांति है कि महाभारत युद्ध में पूरे विश्व के राजा अपनी अपनी सेनाओं के साथ लड़े थे, जबकि सत्यता यह है कि महाभारत युद्ध में भाग लेने वाले राजा मात्र आर्यावर्त अर्थात प्राचीन भारत के ही…

महापुरुष जंगल क्यों चले जाते हैं : Yogesh Mishra

 84 लाख योनियों में अपने चेतना के प्रति मनुष्य ही सबसे संवेदनशील जीव है ! अतः ईश्वर द्वारा मनुष्य को यह वरदान प्राप्त है कि वह निरंतर अपने चेतना के विकास करने के लिये चेतना की ऊर्जा के प्रति संवेदनशील…

मनुष्य सामाजिक प्राणी नहीं है : Yogesh Mishra

पश्चिम जगत की हजारों अर्थहीन, अविकसित, भ्रमक, आम अवधारणाओं की तरह यह भी एक भ्रांति है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है ! जब की सत्यता यह है कि मनुष्य भावनात्मक प्राणी है ! वह तो समाज से संबंध बस…