दुनिया के सारे दर्शन वेदों से ही क्यों निकले हैं : Yogesh Mishra

न्याय दर्शन कहते हैं कि वेदों की रचना ईश्वर ने की है ! क्योंकि यह मानवीय नहीं हो सकते हैं ! सांख्य दर्शन कहा कि वेदों की रचना ईश्वर ने भी नहीं की है ! वेद प्राकृतिक हैं ! प्रकृति…

न्याय दर्शन कहते हैं कि वेदों की रचना ईश्वर ने की है ! क्योंकि यह मानवीय नहीं हो सकते हैं ! सांख्य दर्शन कहा कि वेदों की रचना ईश्वर ने भी नहीं की है ! वेद प्राकृतिक हैं ! प्रकृति…

प्राय: लोग दरिद्रता का संबंध शिक्षा से जोड़कर देखते हैं ! जबकि अनुभव में यह आया है कि यदि दरिद्र प्रजाति का व्यक्ति शिक्षित हो भी जाये तब भी वह दरिद्र ही बना रहता है ! इस अनुभव से यह…

वैष्णव जीवन शैली में धर्म के नाम पर लूट की अलग-अलग दुकान चलाने के लिए दर्जनों देवी देवताओं का निर्माण वैष्णव धर्माचार्यों ने किया है ! और अलग-अलग देवी-देवताओं को अलग-अलग मानवीय इच्छाओं की पूर्ति करने का पर्याय बना दिया…

(सनातन धर्म विरोधी अम्बेडकरवादी इस पोस्ट से दूर रहें) डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में स्थित महू में 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। प्राय: सभी अंबेडकर भक्त यह बतलाते हैं कि भीमराव अंबेडकर के पास…

एक तरफ एलन मस्क ट्विटर जैसा प्रतिष्ठित सामाजिक संवाद का डिजिटल प्लेटफार्म खरीदते हैं और उसी समय दूसरी तरफ भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का यह बयान आता है कि भारत को फर्जी सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए…

जीवन की सफलता का कोई निश्चित मानक नहीं है ! आपका व्यवहार, आपकी शिक्षा, आपका रंग, रूप, स्वभाव आदि यह सब आपके सहायक हैं ! इनमें से कोई भी चीज हर व्यक्ति को सफल बना सकती हैं ! यह निश्चित…

इस संसार में शिव उपासकों के अतिरिक्त जितने भी महापुरुष हुये हैं, उनमें अधिकांशत: शक्ति उपासक ही रहे हैं ! फिर चाहे वह राम, कृष्ण, अर्जुन, युधिष्ठिर, भीष्म पितामह, वशिष्ठ, विश्वामित्र, शिवाजी आदि कोई भी क्यों न हों ! वैदिक…

बड़े-बड़े मनीषी, चिंतक, विचारक, आध्यात्मिक गुरु और समाज के आम लोग जीवन भर यही चिंतन करते रहते हैं कि आखिर जीवन क्या है ? यह एक बहुत गहरा प्रश्न है और व्यक्ति इस प्रश्न का उत्तर इंद्रियों के माध्यम से…

मनुष्य के जीवन में हर तरह की हर समस्या का कारण कृत्रिम जीवन पद्धति है ! जो हमें वैष्णव जीवन शैली से प्राप्त हुई है ! आज साम्राज्यवादी सोच भी इसी कृत्रिम जीवन पद्धति का विकसित रूप है ! कृत्रिम…

शरीर के दो हिस्से है एक दिल और दूसरा दिमाग ! इन्हीं दोनों के सामंजस्य से शरीर चलता है ! यदि इनका सामंजस्य बिगाड़ जाये तो पहले तो शरीर बीमार पड़ता है, फिर नष्ट हो जाता है ! अर्थात मनुष्य…