कुम्भ की प्राचीनता : Yogesh Mishra

यूं तो कुम्भ पर्व शताब्दियों से भारत के चार नगरों में, जो कि चार दिशायों में विभिन्न नदियों के किनारे बसे हैं, धार्मिक स्नान पर्व के रुप में मनाया जा रहा है ! पर इसका ऐतिहासिक और प्रामाणिक दस्तावेज बहुत…

यूं तो कुम्भ पर्व शताब्दियों से भारत के चार नगरों में, जो कि चार दिशायों में विभिन्न नदियों के किनारे बसे हैं, धार्मिक स्नान पर्व के रुप में मनाया जा रहा है ! पर इसका ऐतिहासिक और प्रामाणिक दस्तावेज बहुत…

हर महापुरुष वक्त से पहले पैदा हुआ इंसान होता है ! यह किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं बनाया जा सकता है ! जिन व्यक्तियों में ईश्वर द्वारा भविष्य देखने का सामर्थ होता है और उस भविष्य को सरल शब्दों में…

ओशो एक महान चिंतक थे ! उन्होंने जीवन को कई आयामों से महसूस किया था ! वह यह चाहते थे कि मनुष्य जीवन के बोझ को न ढ़ोते हुए सीधा-सीधा आनंद को भोगते हुये मोक्ष को प्राप्ति करे ! जिस…

एंटीमैटर केवल एक काल्पनिक तत्व नहीं, बल्कि असली तत्व होता है ! इसकी खोज बीसवीं शताब्दी के पूर्वाद्ध में हुई थी ! तब से यह आज तक वैज्ञानिकों के लिए कौतुहल का विषय बना हुआ है ! जिस तरह सभी…

कहने को तो अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के सखा अर्थात मित्र थे ! पर इसके अलावा अर्जुन कृष्ण के बुआ कुन्ती के लड़के अर्थात कृष्ण के बुएरे भाई भी थे ! इसके साथ ही अर्जुन जब अपनी ममेरी बहन सुभद्रा को…

शिक्षा का तात्पर्य समग्र विकास है किन्तु विशेषज्ञता की शिक्षा के बहाने आज जो पढ़ाया जा रहा है वह हमें शिक्षित तो करता है पर हमारा समग्र विकास नहीं करता है ! जैसे एक गले का डाक्टर दन्त के विषय…

शोषण का नाम लेते ही आरक्षण भोगी वर्ग तत्काल कटोरा लेकर खड़ा हो जाता है और जन्म जन्मांतर की कपोल कल्पित कहानियां सुनाने लगता है ! पिछले 75 सालों से तीन पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ उठाने वाले इन राजनैतिक…

भारत का अतीत बहुत खुबसूरत नहीं बल्कि सदैव से दरिद्रता और शोषण का रहा है ! हां कुछ राजे रजवाड़े या उनके प्रशासनिक चमचे संपन्न हुआ करते थे या धर्म के नाम पर कुछ मठ, मन्दिर चलाने वाले समाज का…

सामाजिक आंदोलन सदैव प्रायोजित और साम्राज्यवाद के विस्तारवादी षडयंत्र का हिस्सा होता हैं ! यह कभी भी स्वस्फूर्त नहीं होते हैं ! फिर चाहे वह गांधी का आंदोलन हो या जयप्रकाश का ! इन सभी आंदोलनों के सूत्र विश्व सत्ता…

गाँधी भारतीय जनमानस का मनोविज्ञान खूब अच्छी तरह जानते थे ! उन्हें मालूम था कि उनके इस अहिंसा की नौटंकी में पढ़ा लिखा सवर्ण वर्ग शामिल नहीं होगा ! क्योंकि सवर्ण यह जानता था कि आजादी क्रांति से मिलेगी !…