जीवन में संघर्ष कहीं नहीं है, बस हमें सही तरह जीना नहीं आता है !

लोग अक्सर जिसे “जीवन का संघर्ष” कहकर अपनी निराशा व्यक्त करते हैं, वह वास्तव में समाज द्वारा निर्धारित ढांचे और उसमें जीने की स्वाभाविक शर्तें हैं। जीवन है तो धोखे और धक्के तो लगे ही रहेंगे ! इसे सामाजिक दृष्टिकोण…








