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भंडारा नहीं भूंखे को भोजन करवाइये

जब आप किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराते हैं, तो वह कृत्य प्रायः करुणा और अंतरात्मा की पुकार से उत्पन्न होता है। वहाँ कोई योजना, दिखावा या भविष्य की आकांक्षा नहीं होती। यह ‘निष्काम कर्म’ के निकट है, जो आत्मा…

भंडारा करवाने वाले दरिद्र क्यों हो जाते हैं

प्रकृति की अपनी एक स्वचालित और संतुलित व्यवस्था है, जहाँ प्रत्येक कार्य का एक निश्चित कारण और परिणाम होता है। जब कोई व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के प्रदर्शन के लिए भंडारे का आयोजन करता है, तो वह अनजाने में प्रकृति के…

नीलकंठ चिकित्सा साधना क्या है

शैव ग्राम के अतीन्द्रिय और गूढ़ रहस्यों में ‘नीलकंठ चिकित्सा साधना’ मात्र कोई लौकिक अनुष्ठान नहीं है, अपितु यह मानव चेतना के गहन अंधकार और जीवन के घोर आघातों को दिव्य ऊर्जा में रूपांतरित कर देने वाली एक परम रहस्यमयी…

दूसरों के लिये आत्म हत्या मत करो

जब एक इंसान परिवार का आधार होता है या अपने व्यापार व कामकाज को संभाल रहा होता है, तो वह आजीवन जिम्मेदारियों के चक्रव्यूह में घिरा रहता है। माता-पिता की उम्मीदें, पत्नी की खुशी, और बच्चों (या बेटे-बहू) के भविष्य…

सोशल मीडिया पर डिजिटल गाली देने के गणितीय लाभ

सामाजिक माध्यम की गणितीय प्रणाली (कलन विधि) पूर्णतः मानवीय भावनाओं के दोहन पर आधारित है। संतों और राजनेताओं को अपशब्द कहने के पीछे छिपे इस पूरे सोशल मीडिया तंत्र के मनोविज्ञान और तकनीकी प्रणाली के अंकगणित के माध्यम से समझिये…

गेहूँ को जहर बनाने का इतिहास

कब्ज की मूल वजह सच यह है कि पारंपरिक सनातन गेहूं के पौधे काफी लंबे (लगभग 4 से 5 फीट) होते थे। इस ऊंचाई के कारण तेज हवा या बारिश में पौधे अक्सर गिर जाते थे, जिससे फसल बर्बाद हो…

ईश्वर को समर्पण का नियम

प्राय: लोग जीवन की चुनौतियों, पारिवारिक कलह या असफलताओं से भागने के लिए ‘धर्म’ या ‘वैराग्य’ का चोला ओढ़ लेते हैं। इसे पलायनवाद कहा जाता है, आध्यात्मिकता नहीं। गृहस्थ आश्रम को सभी आश्रमों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि…

अब मनुष्य को धर्म ग्रंथों की कपोल कल्पित दुनिया से निकलना होगा

जैसे-जैसे विज्ञान और ब्रह्मांड को लेकर मनुष्य की समझ गहरी हो रही है, समाज में यह बहस तेज हो गई है कि हमें प्राचीन मान्यताओं को किस रूप में देखना चाहिए। मानव जाति के सामने आज जलवायु परिवर्तन, बीमारियां और…

अपने ही जीवन काल में मत मरो

मनुष्य केवल श्वास लेने और भौतिक सुख-सुविधाएं भोगने के लिये पैदा नहीं हुआ है। जो व्यक्ति केवल अपने वर्तमान और व्यक्तिगत स्वार्थ तक सिमट कर रह जाता है, उसका वैचारिक और आध्यात्मिक अस्तित्व उसके जीवित रहते ही समाप्त हो जाता…

अधिवक्ता को देवतों का सेनापति क्यों कहते हैं

यह पूरी दुनियां जब आपका शोषण कर रही होती है, आपको डरा रही होती है, उस समय आपका कोई साथ नहीं दे रहा होता है, तब अधिवक्ता ही है जो आपके अधिकारों की रक्षा के लिये अपना मान स्वाभिमान जीवन…