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जीवन में संघर्ष कहीं नहीं है, बस हमें सही तरह जीना नहीं आता है !

लोग अक्सर जिसे “जीवन का संघर्ष” कहकर अपनी निराशा व्यक्त करते हैं, वह वास्तव में समाज द्वारा निर्धारित ढांचे और उसमें जीने की स्वाभाविक शर्तें हैं। जीवन है तो धोखे और धक्के तो लगे ही रहेंगे ! इसे सामाजिक दृष्टिकोण…

जीने का सही तरीका समझो

संवेदना, विश्वास और जिम्मेदारी आज के आधुनिक युग में, जहाँ मनुष्य सुख-सुविधाओं से तो घिरा है, लेकिन आंतरिक शांति से कोसों दूर है ! इसका सबसे बड़ा उदहारण शेयर बाजार के बिगबुल और स्टॉक ट्रेडर राकेश राकेश झुनझुनवाला थे जिनके…

चिड़िया को दाना डालने से भूमि दोष कैसे समाप्त होता है

पक्षियों को दाना खिलाने की परंपरा को अक्सर एक सामान्य धार्मिक कर्मकांड मान लिया जाता है, लेकिन परा-विज्ञान और सूक्ष्म ऊर्जा के सिद्धांतों के अनुसार, इसके पीछे अत्यंत गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तंत्र कारण हैं। भूमि दोष मूलतः किसी स्थान…

गुरु हमारी रक्षा कैसे करता है

आध्यात्मिक सुरक्षा कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि यह सनातन ज्ञान और जीव-विज्ञान का सर्वोच्च शिखर है। एक सच्चा गुरु केवल उपदेशक नहीं होता; वह एक ‘कॉस्मिक फिजिशियन’ (ब्रह्मांडीय चिकित्सक) होता है, जो अपने प्राणों की आहुति देकर शिष्य के अंतःस्रावी…

खरमास में पंचाक्षर मंत्र का महत्व

खरमास की पूर्व संध्या पर पंचाक्षर मन्त्र जप के महत्व पर विशेष बैठक दिनांक 16 दिसंबर 2025 से खरमास शुरू हो रहा है, जो बुधवार 14 जनवरी 2026 तक चलेगा ! खरमास के महीने में भगवान शिव के ‘पंचाक्षर मंत्र’…

कृष्ण और एपस्टीन

एपस्टीन ने कुछ भी नया नहीं किया, अनादि काल से राजाओं और लोकतंत्र के उदय के बाद आज के जमाने के राजा अर्थात नेताओं/अरबपतियों को नियंत्रित करना बच्चों का खेल नहीं है। समकालीन सत्ताओं को अपनी मुट्ठी में रखने के…

कालातीत साधना के गहन सूत्र

एक ही जन्म में लाखों जन्मों को कैसे जियें   हमने शास्त्रों में पढ़ा है कि हमारे ऋषि-मुनि, राक्षस-दैत्य, एक जीवन में ही हजारों साल की तपस्या कर लेते थे यह कैसे संभव था, इस विज्ञान पर आज चर्चा करेंगे…

ईश्वरीय सूचनाओं से कैसे जुड़ें

ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ाव समष्टि चेतना में पहले से ही सब कुछ दर्ज है, जिसे “आकाशीय रिकॉर्ड” कहा जाता है ! अध्यात्म मानता है कि हर स्थूल घटना जो दुनिया में घटने वाली है, वह पहले से ही सूक्ष्म जगत…

क्या इल्युमिनाटी के संस्थापक शुक्राचार्य थे

अंधभक्त वैष्णव इस लेख से दूर रहें, यह प्रबुद्ध वर्ग के लिये लिखा गया है ! इल्युमिनाटी का अर्थ है “प्रबुद्ध” या “ज्ञानवान”। इसके प्रमुख पर्यायवाची शब्द कुलीन वर्ग, अभिजात वर्ग, श्रेष्ठजन, विद्वान, प्रबुद्धजन हैं। शास्त्रों के अनुसार इल्युमिनाटी समाज…

आपका मानसिक विचार ही आपका संसार है

जीवन के सुख दुःख, समृद्धि आभाव, यश अपयश यह सब आपके मानसिक विचारों की अभिव्यक्ति मात्र है अर्थात आपका मानसिक विचार ही आपका प्रगति पूर्ण संसार है, यही पूंजी है, संसाधन है, न कि कोई बजट और न ही ईट…