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हम ईश्वर को धोखा कैसे देते हैं?

जीवन में ईश्वर की कृपा को मापने का वास्तविक पैमाना क्या है? असीमित धन, कृत्रिम विलासिता या समाज में झूठा दिखावा? कदापि नहीं। परमेश्वर की सच्ची कृपा केवल उन सात शाश्वत स्तंभों में निवास करती है, दो वक्त की शुद्ध…

स्वयं को बदलने का आमंत्रण

मैं कोई धर्म गुरु नहीं, एक विचारक हूँ परंपरागत रूप से धर्म गुरु अनुयायियों को चमत्कारों, कर्मकांडों और मान्यताओं के जाल में उलझाते हैं। वह प्रायः अनुयायियों को अपने ऊपर निर्भर बनाते हैं। इसके विपरीत, एक विचारक का कार्य व्यक्ति…

सामान्य मानव से महामानव की यात्रा

यह एक सार्वभौमिक सत्य है कि ईश्वर या प्रकृति मनुष्य को केवल मूलभूत शारीरिक आवश्यकताओं के साथ इस दुनिया में भेजती है। जब कोई शिशु जन्म लेता है, तो उसकी चेतना केवल भूख, प्यास, नींद और सुरक्षा जैसी जैविक जरूरतों…

समाज से बच कर रहो

दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह कोई राजनीतिक शासक या क्रूर सरकार नहीं, बल्कि हमारा अपना ‘विकृत चित्त समाज’ है। जिसे “सामाजिक तानाशाही” नाम दिया जा सकता है। यह एक ऐसा अदृश्य पिंजरा है, जो बिना किसी तार्किक आधार के, केवल…

संसार में रस और मुक्ति की इच्छा दोनों एक साथ ईश्वर को पसंद नहीं है

संसार के भोगों में आसक्ति और मुक्ति की कामना, यह दोनों प्रवृत्तियां एक-दूसरे के सर्वथा विपरीत हैं, जैसे पूर्व और पश्चिम दिशा। एक ही समय में इन दोनों की इच्छा करना आध्यात्मिक मार्ग पर एक गहरा विरोधाभास है ! मुक्ति…

संसार प्रवृत्ति से निवृत्ति की यात्रा है

भारतीय दर्शन और सनातन परम्परा में ‘संसार’ केवल एक भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि यह आत्मा के क्रमिक विकास की एक प्रयोगशाला है। मानव जीवन का चरम लक्ष्य इसी संसार में रहते हुए पूर्णता को प्राप्त करना है। वेदों और…

संतों को वैश्विक ख्याति कैसे बनाया जाता है

किसी भी संत को वैश्विक ख्याति प्राप्त महापुरुष के रूप में स्थापित करने के लिए एक सुनियोजित योजना और रणनीति की आवश्यकता होती है ! जिसे जन सम्पर्क योजना या मार्केटिंग कह सकते हैं ! किसी संत की पहचान केवल…

शैव ग्राम में अहंकार मुक्त प्रवेश

भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में ‘शैव ग्राम’ केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि चेतना के उच्च आयाम को छूने का एक जीवंत केंद्र है। यहाँ की हर एक शिला और हर एक मार्ग में गुरुदेव के दिव्य विचार और…

शेष सभी गुरु ठग हैं

सद्गुरु का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि सत्य बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा का एक ‘अदृश्य’ जगत है, जहाँ कोई भी सहजता से गुरु का चोला पहनकर दुकान खोल सकता है। इसीलिये…

सामान्य व्यक्ति को वैश्विक ख्याति प्राप्त सन्त बनाने की कला

किसी भी सामान्य व्यक्ति को वैश्विक ख्याति प्राप्त सन्त बनने के लिये 6 चरण में कार्य करना पड़ता है ! पहला चरण मूल विचार और विशिष्ट छवि का निर्माण: सामान्य व्यक्ति आध्यात्मिक की पहचान केवल कर्मकांड तक सीमित न रखकर,…