बेरोजगारी एक भ्रम है : Yogesh Mishra

आज दुनिया का कोई भी अर्थशास्त्री आपको यह नहीं बतलायेगा कि बेरोजगारी एक भ्रम है ! जिसे जानबूझकर समाज में फैलाया गया है ! इसके पीछे संपन्न लोगों का उद्देश्य अपनी प्रतिस्पर्धा समाप्त करना है ! इसीलिए हमें दुनिया के…
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आज दुनिया का कोई भी अर्थशास्त्री आपको यह नहीं बतलायेगा कि बेरोजगारी एक भ्रम है ! जिसे जानबूझकर समाज में फैलाया गया है ! इसके पीछे संपन्न लोगों का उद्देश्य अपनी प्रतिस्पर्धा समाप्त करना है ! इसीलिए हमें दुनिया के…

यह भारत का इतिहास रहा है कि जब भी कोई सनातन धर्म की रक्षा के लिए कोई भी प्रभावशाली कदम उठाता है उसे वैश्विक षड्यंत्रकारी किसी न किसी महान संकट में जरूर डाल देते हैं ! फिर वह चाहे आसाराम…

एक्टोलाइफ प्रजनन कम्पनी कृतिम पध्यति से प्रति वर्ष 30,000 मन चाहे बच्चे पैदा कर सकती है ! इस समय कंपनी के पास 75 लैब हैं जिन्हें जल्द ही 200 से अधिक बना लिया जायेगा ! इस पूरे कॉन्सेप्ट की शुरुआत…

यदि प्रकृति को परिभाषित करना हो तो एक लाइन में कहा जा सकता है कि पंचतत्व का प्रगट स्वरूप ही प्रकृति है ! अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये कि प्रकृति में जो भी प्रगट स्वरूप इंद्रियों से अनुभूत हो…

हिंदू धर्म में बहुत से ऐसे शब्द हैं, जिनके विषय में हिंदू यह मानकर चलता है कि यह अंतिम निष्कर्ष का शब्द है ! अब इसमें किसी भी पुनर्विचार की आवश्यकता नहीं है ! जैसे सत्य, तप, त्याग, प्रारब्ध, सुर,…

ध्यान के दो अर्थ होते हैं ! सामान्य प्रचलित भाषा में किसी विषय, वस्तु, व्यक्ति, उद्देश्य पर मन और भाव को केन्द्रित करना ध्यान है ! जिसे हम त्राटक के नाम से भी जानते हैं ! वैष्णव जीवन शैली में…

सामान्यतया यह कहा जाता है कि अधिवक्ता और राजनीतिज्ञ सबसे अधिक झूठ बोलते हैं ! किंतु मैंने व्यवहार में देखा है कि अपना धंधा चलाने के लिए सबसे अधिक झूठ बोलने का कार्य भगवान के नाम पर कथावाचक करते हैं…

नॉलेज का सामान्य अर्थ सूचना की जानकारी होना है और विजडम का तात्पर्य सूचना के संदर्भ में विवेक पूर्ण अनुभूति होना है ! नॉलेज सामान्य सूचना प्राप्ति और मस्तिष्क का विषय है ! जबकि विजडम आंख, नाक, कान, मस्तिष्क, के…

तिब्बत का प्राचीन नाम त्रिविष्टप है ! तिब्बत प्राचीन काल से ही योगियों और सिद्धों का घर माना जाता रहा है ! पहले यह भारत का हिस्सा था ! 1912 में तिब्बत के 13वें धर्मगुरु दलाई लामा ने तिब्बत को…

जिस तरह प्रत्येक मनुष्य के बुद्धि का अपना एक स्तर होता है ! ठीक उसी तरह समाज की सामूहिक बुद्धि का भी अपना एक स्तर होता है ! इन दोनों ही तरह के बुद्धियों को विकसित करने का एक क्रम…