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क्या ब्रह्मचर्य की अवधारणा एक भ्रम है : Yogesh Mishra

 ब्रह्मचर्य को वैष्णव जीवन शैली में बहुत महत्व दिया गया है ! न जाने कितने कपोल कल्पित उदाहरणों से  वैष्णव द्वारा मनुष्य को यह समझाने की कोशिश की जाती रही है कि जीवन में ब्रह्मचर्य से अद्भुत शक्तियां प्राप्त की…

क्या बौद्ध धर्म वास्तव में कोई धर्म है : Yogesh Mishra

भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को न मानने वाले बौद्ध धर्मी पहले यह सिद्ध करें कि क्या वास्तव में बौद्ध धर्म जैसा कोई धर्म कभी था ! जिस के संस्थापक कोई गौतम बुद्ध जैसा व्यक्ति हुआ करता था !…

क्या फिलॉसफी और दर्शन अलग अलग हैं : Yogesh Mishra

क्या फिलोसोफी दर्शन का अनुवाद है ! ऐसा नहीं है, दोनों अलग अलग हैं ! दुनिया में कोई भी दो शब्द पूरी तरह से एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हो सकते हैं ! दर्शन शब्द भारतीय परंपरा ने गढ़ा है…

क्या दशरथ चक्रवर्ती सम्राट नहीं बल्कि एक काबिले के राजा थे  : Yogesh Mishra

गोस्वामी तुलसीदास ने राजा दशरथ को रामचरितमानस में एक चक्रवर्ती सम्राट कह कर संबोधित किया है और साथ में यह भी बतलाया है कि राजा दशरथ का इतना प्रभाव और सामर्थ्य था कि वह किसी भी व्यक्ति को राजा बना…

क्या अब भगवान की मनुष्य को आवश्यकता नहीं है : Yogesh Mishra

विश्व के कई देशों ने आज यह सिद्ध कर दिया है कि अब मनुष्य को भगवान की जरूरत नहीं रह गई है ! क्योंकि जिन देशों ने भगवान को नकार दिया है ! वह सभी देश आज पहले से अधिक…

किसकी कृपा से बना था बेलूर मठ : Yogesh Mishra

बेलूर मठ भारत के पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के पश्चिमी तट पर बेलूर में स्थित है ! यह रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ का मुख्यालय है ! इस मठ के भवनों की वास्तु में हिन्दू, इसाई तथा इस्लामी तत्वों…

ईश्वरीय कैसे हमारी रक्षा करता है : Yogesh Mishra

 प्रायः लोग मुझसे यह प्रश्न करते हैं कि जब भारत कितना बड़ा आध्यात्मिक देश था, तो भारत अलग-अलग समय में विभिन्न विधर्मियों के अधीन गुलाम कैसे हो गया !  इस रहस्य को जानने के लिए यह परम आवश्यक है कि…

कभी इस पृथ्वी पर बस सिर्फ शैवों का शासन था : Yogesh Mishra

 जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि आज से 10,000 साल पहले भारत पर वैष्णव आक्रांताओं ने छल पूर्वक अपना नियंत्रण करना शुरू कर दिया था ! जिसे भारत के इतिहास में आर्यों का आगमन कहा गया ! जिससे…

अनियंत्रित इंद्रियां ही अपराध का कारण हैं : Yogesh Mishra

वैष्णव मत दर्शन के अनुसार मनुष्य को 14 इंद्रियां प्राप्त हैं ! पांच ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा; पांच कर्मेंद्रियां हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग और चार अंतःकरण मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ! मन, बुद्धि, चित्त…

वैश्विक आर्थिक मंदी भारतीयों के लिए एक सुनहरा अवसर : Yogesh Mishra

जैसा कि विश्व के सभी अर्थशास्त्री घोषणा कर रहे हैं कि दिसंबर 2022 से जुलाई 2023 तक पूरी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएगी ! इस तरह की घोषणा अपने आप में यह सिद्ध करती है कि आर्थिक…