क्या योग वशिष्ठ शैव ग्रंथ है : Yogesh Mishra

वशिष्ठ ऋषि वैदिक काल के विख्यात थे ! इनके ज्ञान के कारण इन्हें सप्तर्षि में भी शामिल किया गया था ! यानि ऐसा माना जाता है कि इन्हें वेदों की रचना करने वाले ईश्वर द्वारा सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ…
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वशिष्ठ ऋषि वैदिक काल के विख्यात थे ! इनके ज्ञान के कारण इन्हें सप्तर्षि में भी शामिल किया गया था ! यानि ऐसा माना जाता है कि इन्हें वेदों की रचना करने वाले ईश्वर द्वारा सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ…

ब्रह्मचर्य को वैष्णव जीवन शैली में बहुत महत्व दिया गया है ! न जाने कितने कपोल कल्पित उदाहरणों से वैष्णव द्वारा मनुष्य को यह समझाने की कोशिश की जाती रही है कि जीवन में ब्रह्मचर्य से अद्भुत शक्तियां प्राप्त की…

भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व को न मानने वाले बौद्ध धर्मी पहले यह सिद्ध करें कि क्या वास्तव में बौद्ध धर्म जैसा कोई धर्म कभी था ! जिस के संस्थापक कोई गौतम बुद्ध जैसा व्यक्ति हुआ करता था !…

क्या फिलोसोफी दर्शन का अनुवाद है ! ऐसा नहीं है, दोनों अलग अलग हैं ! दुनिया में कोई भी दो शब्द पूरी तरह से एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हो सकते हैं ! दर्शन शब्द भारतीय परंपरा ने गढ़ा है…

गोस्वामी तुलसीदास ने राजा दशरथ को रामचरितमानस में एक चक्रवर्ती सम्राट कह कर संबोधित किया है और साथ में यह भी बतलाया है कि राजा दशरथ का इतना प्रभाव और सामर्थ्य था कि वह किसी भी व्यक्ति को राजा बना…

विश्व के कई देशों ने आज यह सिद्ध कर दिया है कि अब मनुष्य को भगवान की जरूरत नहीं रह गई है ! क्योंकि जिन देशों ने भगवान को नकार दिया है ! वह सभी देश आज पहले से अधिक…

बेलूर मठ भारत के पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के पश्चिमी तट पर बेलूर में स्थित है ! यह रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ का मुख्यालय है ! इस मठ के भवनों की वास्तु में हिन्दू, इसाई तथा इस्लामी तत्वों…

प्रायः लोग मुझसे यह प्रश्न करते हैं कि जब भारत कितना बड़ा आध्यात्मिक देश था, तो भारत अलग-अलग समय में विभिन्न विधर्मियों के अधीन गुलाम कैसे हो गया ! इस रहस्य को जानने के लिए यह परम आवश्यक है कि…

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि आज से 10,000 साल पहले भारत पर वैष्णव आक्रांताओं ने छल पूर्वक अपना नियंत्रण करना शुरू कर दिया था ! जिसे भारत के इतिहास में आर्यों का आगमन कहा गया ! जिससे…

वैष्णव मत दर्शन के अनुसार मनुष्य को 14 इंद्रियां प्राप्त हैं ! पांच ज्ञानेंद्रियां आंख, कान, नाक, जीभ और त्वचा; पांच कर्मेंद्रियां हाथ, पैर, मुंह, गुदा और लिंग और चार अंतःकरण मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार ! मन, बुद्धि, चित्त…