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शैव ग्राम को क्यों है प्रबुद्ध उदार व्यक्तियों की तलाश

प्राकृतिक आवास और स्वस्थ्य वर्धक भोजन संस्थान की ओर से फ्री  व्यक्ति अपने जीवन में चाहे कितनी ही महान उपलब्धियाँ हासिल कर ले, किन्तु बुढ़ापे में उसका अनुभव किसी काम नहीं आता है और उसके अशक्त होने के साथ-साथ धीरे…

शैव ग्राम कैसा है  

जहाँ सदस्यों के लिये सब कुछ फ्री है प्रकृति और आधुनिकता के साथ कैश लेस जीवन शैली सनातन ज्ञान पीठ के संस्थापक गुरुदेव योगेश कुमार मिश्र द्वारा परिकल्पित ‘शैव ग्राम’ एक ऐसा अद्वितीय आत्मिक ग्राम है, जो आज की तनावपूर्ण,…

शैव ग्राम के संस्थापक का परिचय

प्रयागराज में जन्मे योगेश कुमार मिश्र एक विश्व प्रख्यात भारतीय प्राच्य विद्या के विचारक, इतिहासकार, संवैधानिक शोधकर्ता, ज्योतिष रत्न और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व भारत सरकार के अधिवक्ता हैं। जिन्होंने भारत के प्रथम उत्तर प्रदेश गौसेवा आयोग के निर्माण तथा…

शैव ग्राम की सदस्यता के नियम

पूरे विश्व से बहुत से साथी शैव ग्राम की सदस्यता के लिये निरंतर संपर्क कर रहे हैं, किन्तु शैव ग्राम की सदस्यता के लिये कुछ अनिवार्य शर्तें हैं, जिन्हें सभी को जानना और मानना आवश्यक है ! सदस्यता देने पर…

शैव ग्राम की विशेष साधना

क्या आप भी संस्कार चिकित्सा के द्वारा अपना भविष्य बदलना चाहते हैं, तो इस लेख को ध्यान से पढ़िये ! आपका वर्तनाम जीवन कई जन्मों पहले निर्धारित हो चूका है ! यही आपका भाग्य है किन्तु इसे आप बदल सकते…

शैव ग्राम का दिव्य स्वरूप

शैव ग्राम भारत में एक “निष्काम कर्म” आधारित “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सेवा परमो धर्म:” के दर्शन पर आधारित दिव्य साधना एवं जीवनचर्या स्थल होगा। प्रत्येक साधक को आर्थिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दी जायेगी, लेकिन फिर भी साधकों में अपना…

शैव ग्राम आपकी अपनी एक अद्भुत तप स्थली

यहाँ आपके हिस्से के भोजन और आवास की फ्री व्यवस्था ईश्वर ने पहले से ही कर रखी है, क्या आप तैय्यार हैं, ईश्वर का कार्य करने के लिये ?  हर व्यक्ति अपने जीवन में तीन आयाम पर लड़ता है !…

शैव को संसार में कैसे जीना चाहिये

शैव जीवन शैली का दर्शन अत्यंत गूढ़, यथार्थवादी और कर्म-प्रधान है। शैव जीवन दर्शन को मानने वाले के सभी सांसारिक कार्य शिव करते हैं,” तो इसका अर्थ यह नहीं है कि शैव अपने जीवन में अकर्मण्य होकर बैठ जाये। बल्कि…

साधना से शिव भक्त का आतंरिक स्वरूप कैसा हो जाता है

भगवान शिव को ‘आदियोगी’, ‘महादेव’ और ‘वैरागी’ कहा जाता है। जो साधक गहरे स्तर पर भगवान शिव की साधना करता है, उसका चित्त शिव के स्वरूप में ढलने लगता है। तब साधक चित्त की वृत्तियों को निरुद्ध कर मन के…

शाररिक सुख सभी सुखों की उत्पत्ति का आधार है

शरीर के सुख से बड़ा सुख कोई नहीं है, यह सभी सुखों की उत्पत्ति का आधार है ! इसलिए सबसे पहले इस शरीर के सुख की चिंता करो, यही जीवन में सुखी होने का रहस्य है । शारीरिक सुख और…