शैव ग्राम चेतना का तीर्थ

शैव ग्राम केवल 10 एकड़ का भूखंड या आवासीय प्रकल्प नहीं है; यह पिण्ड (मानव देह) और ब्रह्मांडीय लय के पूर्ण एकाकार का एक जीवंत ‘पारिस्थिकीय तीर्थ’ है। आधुनिक समाज कृत्रिम जीवनशैली, वैचारिक विषाक्तता और स्नायविक ताप से जल रहा…

शैव ग्राम केवल 10 एकड़ का भूखंड या आवासीय प्रकल्प नहीं है; यह पिण्ड (मानव देह) और ब्रह्मांडीय लय के पूर्ण एकाकार का एक जीवंत ‘पारिस्थिकीय तीर्थ’ है। आधुनिक समाज कृत्रिम जीवनशैली, वैचारिक विषाक्तता और स्नायविक ताप से जल रहा…

आपने भी ने अपने जीवन में यह अनुभव किया होगा कि जब हम कोई ऐसा काम करते हैं जिसमें हमारी कोई रुचि नहीं होती, तो हमें बार-बार भूख लगती है, थकान हावी होने लगती है और मन किसी न किसी…

उच्च चेतना के महापुरुषों के लिए प्राकृतिक चिकित्सा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि उनके भौतिक शरीर (पिण्ड) को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रचंड प्रवाह के बीच जीवित और संतुलित रखने का एकमात्र विशुद्ध वैज्ञानिक व्यवस्था है। जब चेतना पूरी तरह से…

संसार के प्रशिक्षण स्थल में हम सब केवल सहयोगी हैं इस अनंत ब्रह्मांड में परम सत्य केवल एक ही है, और उस सत्य का बोध कराने वाले आदिगुरु केवल शिव हैं। जब हम चेतना के सर्वोच्च शिखर की बात करते…

जिस प्रकार सघन अंधकार ही भोर के प्रथम प्रकाश को जन्म देता है, उसी प्रकार मनुष्य की विपदाएं और उसकी कमजोरियां ही उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करती हैं। वैदिक ज्योतिष में जन्म कुण्डली के छठे, आठवें और बारहवें…

शरीर और चेतना का प्रथम मिलन बिंदु है लग्न, और लग्नेश का बल ही मनुष्य को आपदा से निकालकर उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करता है। वैदिक ज्योतिष में ‘लग्न’ का अर्थ है मनुष्य का अपना शरीर, उसका स्वभाव,…

स्वयंसेवकों को आकर्षित करने और युवाओं को स्थायी रूप से एक वैचारिक आंदोलन से जोड़ने के लिए यह व्यावहारिक रणनीतियाँ सबसे अधिक कारगर सिद्ध होती हैं ! आज का युवा और विदेशी नागरिक कृत्रिम मार्केटिंग के बजाय प्रामाणिकता की ओर…

आत्म-विश्वास किसी बाज़ार में बिकने वाली कृत्रिम वस्तु नहीं है, बल्कि यह सूर्य के सत्य और मंगल के पुरुषार्थ से जाग्रत होने वाली वह प्रखर अग्नि है जो मनुष्य को जीवन के हर समर में अजेय बनाती है। वैदिक ज्योतिष…

सामान्यतः आध्यात्मिक जगत में ‘आत्मज्ञान’ को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य और मोक्ष का द्वार माना जाता है। हर साधक इसी की प्राप्ति के लिए जप, तप और ध्यान करता है। लेकिन एक अत्यंत गूढ़ और व्यावहारिक दृष्टिकोण यह भी है…

“असंभव” मानसिक जड़ता है, जो हमारे संकीर्ण सोच की अभिव्यक्ति मात्र है, जो हमारे अज्ञात भय और सीमित सोच से निर्मित होता है। इसे चिंतन पाथ को बदल कर बदला जा सकता है। भविष्य का जीवन सदैव असंभव के उस…