Category Shaivgram

भक्त किसी का सगा नहीं है

मानव का ईश्वर या परमात्मा से संबंध हमेशा से ही आस्था और विश्वास की नींव पर टिका रहा है। लेकिन आधुनिक दौर में यह संबंध ज्ञान, आत्म-शुद्धि या ‘मुक्ति’ की बजाय काफी हद तक ‘आध्यात्मिक उपभोक्तावाद’ में बदल गया है।…

बड़े आश्रमों में शिष्यों का प्राइवेट पार्ट क्यों काट दिया जाता है

आध्यात्मिक पवित्रता, मोक्ष या उच्च चेतना के नाम पर शिष्यों के गुप्तांग काटने या नपुंसक बनाने की परंपरा विश्वव्यापी है ! 18वीं से 20वीं शताब्दी के मध्य रूसी चरमपंथी संप्रदाय में समय-समय पर हजारों अनुयायियों ने इस प्रथा को अपनाया…

बच्चों को महंगा पढ़ाना बंद कीजिये

आज हम जिस पारंपरिक शिक्षा प्रणाली को बच्चों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी मानते हैं, वह अगले कुछ ही वर्षों में अप्रासंगिक हो जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्रांति के इस दौर में, स्कूलों और कॉलेजों की महंगी फीस पर…

प्रवृत्ति और निवृत्ति की यात्रा  

शैवों के लिये तर्पण कर्म व्यर्थ है ! वैष्णव संचय से शैव वैराग्य की दार्शनिक यात्रा भारतीय सनातन दर्शन में जीवन को समग्रता से समझने के लिए दो समानांतर धाराएं प्रवाहित होती हैं, प्रवृत्ति (संसार से जुड़ना) और निवृत्ति (संसार…

पैसे खर्चने से पहले यह लेख पढ़िये

युवाओं से अपील वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहां भू-राजनीतिक तनाव, संरक्षणवाद और उच्च ब्याज दरों ने निवेश के पारंपरिक नियमों को बदल कर रख दिया है। वहीं, भारत के घरेलू मोर्चे पर हालिया राजनीतिक…

शैव ग्राम की नीलकंठ चिकित्सा साधना सब के लिये क्यों नहीं है

आज मेरे पास पूरे विश्व से बहुत से लोग अपने अपने रोगों की शांति के लिये संपर्क करते रहते हैं और शैव ग्राम में आने की जिद्द करते हैं ! उन सभी साथियों से यह मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ…

नीलकंठ चिकित्सा साधना का इतिहास

शैव ग्राम की तपोभूमि से उपजी ‘नीलकंठ चिकित्सा साधना’ केवल एक विधान नहीं, बल्कि काल और चेतना के मध्य का वह रहस्य है, जिसकी जड़ें शिव द्वारा हलाहल विष पान की आदिम घटना में गहराई तक धंसी हैं। यह देह…

धार्मिक व्यक्ति क्यों अधिक अपराधी होता है

धार्मिक आवरण और आपराधिक प्रवृत्तियों के बीच का अंतर्विरोध मूलतः मानव मन की जटिलताओं और जीवन के प्रति उसके दार्शनिक दृष्टिकोण के पतन का परिणाम है। जब कोई व्यक्ति धर्म का पालन करते हुए भी अपराध की ओर प्रवृत्त होता…

ज्ञान, सौंदर्य और कर्मठता का ग्रह योग

ज्ञान जब आचरण में ढलता है, सौंदर्य जब प्रकृति का आदर करता है और कर्म जब स्वावलंबन का सृजन करता है, तब मनुष्य सही अर्थों में एक महापुरुष कहलाता है। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति, दैत्यगुरु शुक्र और कर्मफल दाता…

‘जेन जी’ से ‘ज़ॉम्बी’ तक की यात्रा

अगली पीढ़ी को नष्ट होने से बचाना होगा ! युवाओं का ‘जेन जी’ से ‘ज़ॉम्बी जनरेशन’ में तब्दील होना केवल एक कहावत नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल और मेटाबॉलिक सत्य है। पिज्जा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक कैफीन जैसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड आहार सीधे…