Category Shaivgram

शैव और वैष्णव में अंतर

भगवान शिव और भगवान विष्णु को धूर्त वैष्णव ठीक वैसे ही एक परम सत्ता के दो रूप बतलाते हैं, जैसे मुस्लमान भगवान और अल्लाह को एक ही बताते हैं और इसाई जीसस और कृष्ण को एक बतलाते हैं ! लेकिन…

वैष्णव ब्रह्मचर्य धारण क्यों नहीं कर पाते हैं

मैं आज प्रात: एक आश्रम गया था, वहां पर गेट पर ही मैने एक बोर्ड पढ़ा “आश्रम में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है !” मेरे मन में यह विचार चला कि जब स्वामी जी गुणातीत और सर्व इन्द्रीय विजेता हैं,…

म्रेरी पत्नी समर्पण और त्याग की प्रतिमूर्ति

भारतीय संस्कृति में पत्नी को ‘सहधर्मिणी’ और ‘अर्धांगिनी’ की उपाधि दी गई है, जिसका वास्तविक अर्थ है,धर्म, कर्म और जीवन के हर संकल्प में पति के साथ समान रूप से कदम मिलाकर चलना। आधुनिक युग में, जहाँ मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं…

मैंने शैव ग्राम के लिए राजस्थान को क्यों चुना ?

लगभग एक वर्ष पूर्व मेरे शिष्य सुशील कुमार जांगिड मुझे अपने निवास स्थान सवाई माधवपुर, राजस्थान भ्रमण के लिये ले गये थे ! जहाँ पर भीड़ भाड़ से दूर, आडम्बर विहीन, राजस्थान की सादगी में मुझे शिव का वैराग्य नजर…

प्रकृति का पोषण ही ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है

ईश्वर का निवास केवल मंदिरों की चारदीवारी या पाषाण मूर्तियों में नहीं, बल्कि प्रकृति के कण-कण में है। बहती नदियाँ, लहलहाते पेड़ और चहचहाते पक्षी, यह सब ईश्वर का जीवंत और निश्छल स्वरूप है। इसलिए, प्रकृति का पोषण ही वास्तव…

धार्मिक अवसाद से मुक्ति बस सिर्फ शैव ग्राम में मिलती है

मानव मन जब तथाकथित धर्म के कपोलकल्पित रहस्यों और मृत्यु के पार की अनिश्चितताओं से घिर जाता है, तो वह ‘अज्ञात भय’ से भयभीत हो जाता है !  यही काल्पनिक अज्ञात भय जब व्यक्ति के विश्वास और मनोभाव पर हावी…

धर्म से बड़ा धोख कोई नहीं है

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तथाकथित ‘धर्म’ प्रायः रूढ़ियों, कर्मकांडों और विवेकहीन अंधे अनुकरण का पर्याय बन गया है। जहाँ तर्क और विश्लेषण समाप्त हो गया है, अब बस सिर्फ अंधविश्वास और भय बचा है। इसी सैद्धांतिक यथार्थ को गहराई से समझते…

धर्म के व्यवसाइयों से दूर रहिये

आज धर्म के नाम पर पाखंड और व्यवसाय का धंधा जोरों पर है। कुछ तथाकथित ‘धूर्त धर्म गुरु’ भगवा पहन कर लोगों की आस्था, डर और मजबूरियों का फायदा उठाकर उनका भावनात्मक और आर्थिक शोषण कर रहे हैं। जब कोई…

तुम्हारी प्राण ऊर्जा ही ईश्वर है

शैव जीवन दर्शन के अनुसार मनुष्य की प्राण ऊर्जा ही ईश्वर है, जिस हम वृत्ति के आवेग में देख नहीं पा रहे हैं, शैव दर्शन कहता है, ईश्वर को पाने के लिए कहीं मत भटकिये, बस सबसे पहले अपने प्राण…

गुरुदेव सभी को शैव ग्राम क्यों नहीं बुलाते हैं

शैव जीवन शैली भगवान शिव के आडम्बर विहीन, अपरिग्रह अर्थात न्यूनतम आवश्यकता में जीवन निर्वाह करना, प्रकृति से प्रेम मात्र ही नहीं उसका नि:स्वार्थ संरक्षण और पोषण भी करना, निरंतर आत्म-सुधार, विवेकपूर्ण आत्म अनुशासन, दूसरे के प्रति सेवा, सहयोग का…