ब्रह्मास्मि क्रिया योग पर नव सत्र आरम्भ

शैव ग्राम में मस्तिष्क के नव-निर्माण द्वारा दीर्घ आयु होने पर चर्चा एक समय था जब विज्ञान जगत में यह पक्का विश्वास था कि हमारे मस्तिष्क की बनावट बचपन में ही तय हो जाती है और इसे किसी यंत्र की…

शैव ग्राम में मस्तिष्क के नव-निर्माण द्वारा दीर्घ आयु होने पर चर्चा एक समय था जब विज्ञान जगत में यह पक्का विश्वास था कि हमारे मस्तिष्क की बनावट बचपन में ही तय हो जाती है और इसे किसी यंत्र की…

ब्रह्म तत्व कोई भगवान नहीं देता, यह एक मानसिक प्रक्रिया है, जिसे स्वयं ही अपनी समझ से विकसित करना पड़ता है ! जीव के उत्थान के 7 चरण हैं ! जब जीव इन सातों चरण की जीवन शैली को परिपक्वता…

शैव ग्राम अर्थात शिव के आदर्शों पर आधारित कल्याणकारी समूह और सनातन ज्ञान पीठ अर्थात शाश्वत जीवन के ज्ञान का केंद्र की मूल कार्यशैली ‘शिव’ अर्थात् समग्र कल्याण के शाश्वत सत्य पर आधारित ऊर्जा। इन मानकों के अनुसार, समाज का…

जीवन में सुख और शांति का यह एक अत्यंत गूढ़ और यथार्थवादी सूत्र है। जब कोई व्यक्ति किसी कट्टर सामाजिक या धार्मिक समूह (जिसे यहाँ ‘गिरोह’ की संज्ञा दी गई है) का हिस्सा बनता है, तो वह अनजाने में अपनी…

जीवन का असली मर्म न तो खुद को एक मशीन की तरह पीसने में है और न ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने में है। अक्सर हम जीवन को दो अतियों में बाँट देते हैं, या तो हम किसी…

आधुनिक युग में सफलता को अक्सर धन और भव्य इमारतों से मापा जाता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े महल भी समय के साथ मिट जाते हैं, जबकि सत्य और नि:स्वार्थ भाव से शुरू किए गए विचार और संस्थाएं…

मनुष्य इस विशाल पृथ्वी पर एकाकी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता। हमारे अस्तित्व का आधार केवल हम स्वयं नहीं, बल्कि हमारे आस-पास मौजूद जीव-जंतु, पशु-पक्षी, नदियाँ और वनस्पतियां हैं। इसी शाश्वत सह-अस्तित्व और भगवान शिव की कल्याणकारी, प्राकृतिक जीवन शैली…

भारतीय संस्कृति में पत्नी को ‘सहधर्मिणी’ और ‘अर्धांगिनी’ की उपाधि दी गई है, जिसका वास्तविक अर्थ है,धर्म, कर्म और जीवन के हर संकल्प में पति के साथ समान रूप से कदम मिलाकर चलना। आधुनिक युग में, जहाँ मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं…