पूतना राक्षसी नहीं चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी : Yogesh Mishra

पूतना राक्षसी नहीं बल्कि चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी ! उसके बचपन का नाम स्वाति था और वह कंस के बचपन की मित्र और कंस के सेनापति प्रद्युम्न की पत्नी थी ! जब कंस को पता चला कि उसके पिता उग्रसेन के…

पूतना राक्षसी नहीं बल्कि चंद्रवंशीय क्षत्राणी थी ! उसके बचपन का नाम स्वाति था और वह कंस के बचपन की मित्र और कंस के सेनापति प्रद्युम्न की पत्नी थी ! जब कंस को पता चला कि उसके पिता उग्रसेन के…

पुष्यमित्र सुंग ने बृहद्रथ को क्यों मारा पूरा सत्य है यह है कि पुष्यमित्र सुंग नामक देशभक्त ने बृहद्रथ नामक देश के गद्दार को मारा अथवा उसे प्राणदंड की सजा दी ! असल में पुष्यमित्र शुंग, महाराज बृहद्रथ के सेनापति…

किसी भी लोकतान्त्रिक देश के शासन व्यवस्था में तीन संवैधानिक और एक अघोषित अर्थात चार स्वतन्त्र अंग होते हैं ! पहला विधायिका – यह अंग देश की जनता द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों द्वारा सामूहिक रूप से देश के संचालन के…

लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि यदि आम जनमानस की भावनाओं का जनप्रतिनिधि सम्मान न करें तो नागरिकों को यह अधिकार है कि वह अपने मौलिक अधिकार की रक्षा के लिये संगठन या समूह बनाकर आंदोलन खड़ा कर सकते हैं…

महोपनिषद् में वर्णित “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् ! उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् !! ( अध्याय 4, श्लोक 71) अर्थात यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते…

व्यक्तित्व में कुछ गुण पैतृक या आनुवांशिक होते हैं ! शरीर का रंग, रूप, शरीर की बनावट गुणों से युक्त हो सकते हैं ! इसका कारण बालक को प्राप्त हुए अपने माता-पिता के गुणसूत्र (क्रोमोसोम्स) हैं ! बालक की आनुवांशिकता…

अपने को विकसित देश का विकसित नागरिक कहने वाले व्यक्तियों से मैं यह पूछना चाहता हूं कि विकसित मनुष्य की पहचान क्या है ! सनातन धर्म के अनुसार जिस मनुष्य में दया, प्रेम, करुणा, स्नेह, सम दृष्टि, सहयोग, सहकारिता, त्याग…

बीजिंग में चीन ने खनिज संसाधन में धनी तिब्बत काउंटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अपने खनन को उचित ठहराया है ! यह क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है ! चीन ने कहा कि यह उसके अधिकार…

मध्य युग में पूरे यूरोप पर राज करने वाला रोम ( इटली ) नष्ट होने के कगार पर आ गया है ! मध्य पूर्व को अपने कदमो से रौंदने वाला ओस्मानिया साम्राज्य (ईरान,सऊदी, टर्की) अब अपने घुटनो पर है !…

प्रत्येक व्यक्ति के चरित्र का निर्माण उसके पूर्व जन्म के संचित संस्कार और वर्तमान परिवेश के अनुरूप होता है ! किंतु एक विषय पर अभी तक मनोवैज्ञानिक चुप हैं कि क्या मनुष्य के द्वारा बोली जाने वाली भाषा का भी…