Political Party

क्या कोरोना आंदोलन के हमारे मौलिक अधिकार को खा जायेगा : Yogesh Mishra

लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि यदि आम जनमानस की भावनाओं का जनप्रतिनिधि सम्मान न करें तो नागरिकों को यह अधिकार है कि वह अपने मौलिक अधिकार की रक्षा के लिये संगठन या समूह बनाकर आंदोलन खड़ा कर सकते हैं ! इसके लिये उन्हें किसी से आज्ञा लेने की आवश्यकता …

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क्या कोरोना विश्व की राजनीति को भी प्रभावित करेगा : Yogesh Mishra

कई हफ़्तों का समय बर्बाद करने के बाद आख़िरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 (कोरोना वायरस) को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है ! चूंकि अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि वैश्विक संस्थाओं और तमाम देशों की सरकारों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य की इस चुनौती से निपटने में किस तरह की …

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इंदिरा गाँधी द्वारा लगाये गये आपातकाल की अच्छाइयाँ : Yogesh Mishra

26 जून 1975 की सुबह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो पर आपातकाल की घोषणा करते हुये पूरा देश को चौंका दिया ! उन्होंने राष्ट्र को समबोधित करते हुये बतलाया कि 25 जून 1975 की आधी रात से देश में आपातकाल लागू होगया है ! जो कि बाद में तीन …

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क्या इंदिरा गाँधी ने गौरक्षकों पर गोली चलवाई थी ! : Yogesh Mishra

7 नवम्बर 1966 को गोपाष्टमी के दिन संसद भवन के सामने धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में गौ हत्या बंदी कानून बनने के लिये विनोबा भावे का आशीर्वाद लेकर संतों का एक बड़ा आन्दोलन शुरू हुआ था ! जिसका महूर्त स्वयं करपात्री जी महाराज ने निकला था …

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बांग्लादेश के जन्म की पीड़ादायक कथा !! : Yogesh Mishra

14 अगस्त 1947 को धर्म पर आधारित स्वतंत्र पाकिस्तान देश का गठन हुआ था ! तत्कालीन पाकिस्तान के दो भाग थे ! पू्र्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान एवं दोनो ही भाग में सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्ष्णिक समानतायें नही थीं ! संसाधनों के अनुसार पूर्वी पाकिस्तान ज्यादा समृद्ध था ! लेकिन राजनीतिक …

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इन्द्रा गाँधी को एक बार नहीं दो बार निकला गया था कांग्रेस से ! : Yogesh Mishra

वैसे तो 1857 की क्रांति के बाद हिंदुस्तान के जनमानस को राजनीतिक मंच देने के लिये 28 दिसंबर 1885 में एक अंग्रेज अफसर ए. ओ. ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसकी स्थापना की थी ! जो थियिसोफिकल सोसाइटी के प्रमुख सदस्य थे तथा उनके साथ दादा भाई नौरोजी और दिनशा …

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मैं श्रीमती इंदिरा गांधी को भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री क्यों मानता हूं ! : Yogesh Mishra

लेख पर पक्ष और विपक्ष दोनों ही तरह के विचारों का स्वागत है ! लेकिन अपनी बात कहने के पहले मैं यह आग्रह करता हूं कि अंधभक्त और बीजेपी के हित चिंतकों में यदि पूरा लेख पढ़ने का धैर्य हो तभी वह नीचे कोई टिप्पणी करें ! अन्यथा बिना किसी …

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क्या देश का सर्वनाश चाहते हैं आर्थिक विकास विरोधी राजनेता : Yogesh Mishra

2014 का चुनाव इसी आर्थिक एजेंडे पर हुआ था कि भारत में बहुत भ्रष्टाचार है और भारत के आम आवाम का पैसा भारतीय तत्कालीन सत्ताधारी नेता भ्रष्टाचार द्वारा कमाकर विदेशी बैंकों में रख रहे हैं ! यदि बीजेपी सत्ता में आयेगी तो वह आर्थिक भ्रष्टाचार पूरी तरह से समाप्त कर …

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राजनैतिक विज्ञापन लोकतंत्र के दुश्मन हैं ! : Yogesh Mishra

चुनावों के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों की उपलब्धियों को उजागर करने वाले विज्ञापन हटाने या फिर उन पर पर्दा डालने का निर्देश दोहराया है ! ऐसा हर बार चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद किया जाता है ! इसके पीछे निर्वाचन आयोग की मंशा राजनेताओं, पार्टियों और …

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लोगो के दिमाग में लगे बौद्धिक ताले राष्ट्र को ही नष्ट कर देंगे : Yogesh Mishra

राजनीतिक सिद्धान्त को कभी-कभी राजनीतिक चिंतन के पर्याय के रूप में देखा जाता है ! लेकिन यह समझ लेना जरूरी है कि उनका अर्थ आवश्यक रूप से एक ही नहीं होता है ! राजनीतिक चिंतन एक सामान्यीकृत मुहावरा है ! जिसमें राज्य तथा राज्य से संबंधित प्रश्नों पर किसी व्यक्ति …

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