
कृष्ण और एपस्टीन
एपस्टीन ने कुछ भी नया नहीं किया, अनादि काल से राजाओं और लोकतंत्र के उदय के…

एपस्टीन ने कुछ भी नया नहीं किया, अनादि काल से राजाओं और लोकतंत्र के उदय के…

एक ही जन्म में लाखों जन्मों को कैसे जियें हमने शास्त्रों में पढ़ा है कि…

ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ाव समष्टि चेतना में पहले से ही सब कुछ दर्ज है, जिसे “आकाशीय…

शुक्राचार्य का ‘असुर दर्शन’ और आधुनिक ‘इल्युमिनाटी’ की कार्यप्रणाली एक ही धुरी पर घूमते हैं !…

अंधभक्त वैष्णव इस लेख से दूर रहें, यह प्रबुद्ध वर्ग के लिये लिखा गया है !…

जीवन के सुख दुःख, समृद्धि आभाव, यश अपयश यह सब आपके मानसिक विचारों की अभिव्यक्ति मात्र…

शैव-दर्शन का उद्घोष है कि “पशुत्वं त्यक्त्वा पतिर्भवेत्”। अर्थात पहले पशु-भाव छोड़ो, तब शिव-भाव आएगा। मतलाब…

सतयुग में देवताओं और असुरों के बीच लगभग सौ वर्षों तक निरंतर और भयंकर युद्ध चला।…

मानव मस्तिष्क की सबसे गहरी और जटिल संरचना हमारा अवचेतन मन है। इसका प्राथमिक मनोवैज्ञानिक उद्देश्य…