
शिव भक्ति सरल, सहज, सस्ती, प्रकृति अनुकूल और अनुकरणीय क्यों है ? : Yogesh Mishra
शैव साहित्यों की शृंखला ही बहुत विस्तृत है ! वैरोचन के ‘लक्षणसार समुच्चय’ में इन आगमों…

शैव साहित्यों की शृंखला ही बहुत विस्तृत है ! वैरोचन के ‘लक्षणसार समुच्चय’ में इन आगमों…

(शोध परक लेख) प्राय: समाज में शनि की महादशा अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा बड़े भय से…

उद्यम असफल होने के कई कारण हैं, किंतु इसमें सबसे पहला कारण यह है कि उद्यमी…

वैष्णव धर्म ग्रंथों के अनुसार भारत में जब वैष्णव जीवन शैली अपने पूर्ण प्रसार पर थी…

सभी कथावाचक बतलाते हैं कि रामायण समाज के हर वर्ग को जोड़ने का दिव्य ग्रंथ है…
इसमें कोई शक नहीं है कि आज अधिकांश सनातन धर्मी वैष्णव जीवन शैली का अनुगमन करते…

वैष्णव दो तरह के होते हैं ! एक अर्ध वैष्णव, दूसरे पूर्ण वैष्णव ! अर्ध वैष्णव…

एक सूक्ति है “विद्या ददाति विनयम” अर्थात “विद्या से विनय की प्राप्ति होती है ! लेकिन…

महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रत्नाकर था और इनके पिता ब्रह्माजी के मानस पुत्र प्रचेता थे…