अपना अपना “वसुधैव कुटुम्बकम्” : Yogesh Mishra

महोपनिषद् में वर्णित “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् ! उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् !! ( अध्याय 4, श्लोक 71) अर्थात यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते…








