रावण के द्वारा रचे गये शास्त्रों की सूची : Yogesh Mishra

अभी कुछ दिन पहले मैंने एक कमेंट डाला था कि महापंडित रावण में अपने जीवन काल में 2700 से अधिक विभिन्न तरह के विभिन्न ग्रंथों का निर्माण किया था ! जिस पर मेरे कुछ साथियों ने यह आग्रह किया कि…

अभी कुछ दिन पहले मैंने एक कमेंट डाला था कि महापंडित रावण में अपने जीवन काल में 2700 से अधिक विभिन्न तरह के विभिन्न ग्रंथों का निर्माण किया था ! जिस पर मेरे कुछ साथियों ने यह आग्रह किया कि…

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण पर आरोप है कि उसने कुबेर के पुत्र नल कुबेर की होने वाली पत्नी रम्भा का बलात्कार किया था ! जिसे रामायण में इस प्रकार लिखा गया है ! “एवमुक्त्वा स तां रक्षो निवेश्य च…

जैसे हिंदू मुसलमान, ईसाई, याहूदी आदि अलग-अलग जीवन पद्धति है ! जिसे कालांतर में धर्म कहकर संबोधित किया गया है और इन सभी जीवन पद्धतियों को मानने वाले व्यक्ति सदैव से दूसरी जीवन पद्धति को मानने वाले व्यक्ति को विधर्मी,…

आजकल एक मूर्खतापूर्ण पोस्ट फेसबुक और व्हाट्सएप पर खूब घूम रही है कि धर्म छुट्टी पर है और विज्ञान काम कर रहा है ! यह तर्क ईसाइयों द्वारा लोगों की सनातन हिन्दू धर्म के देवी देवता और भगवान में आस्था…

वैदिक युग से लेकर कृष्ण काल तक रामायण और महाभारत इन दो ग्रंथों के भीतर वेदों के विरुद्ध वैष्णव लेखकों ने राम और कृष्ण को ईश्वर से ऊपर प्रस्तुत किया है ! जब कि सनातन शैव चिंतन में मिथक या…

शास्त्र पढ़ने के कई कारण होते हैं ! कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन अपना समय पास करने के लिये करते हैं ! तो कुछ लोग अपने बौद्धिक मनोरंजन के लिये भी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं ! कुछ लोग ईश्वर…
शास्त्र पढ़ने के कई कारण होते हैं ! कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन अपना समय पास करने के लिये करते हैं ! तो कुछ लोग अपने बौद्धिक मनोरंजन के लिये भी शास्त्रों का अध्ययन करते हैं ! कुछ लोग ईश्वर…

यह जीव विज्ञान का बहुत ही सामान्य सा सिद्धांत है कि जो व्यक्ति जिस परिवेश में रहता है या जो भोजन करता है ! शरीर उसी के अनुरूप अपना विकास कर लेता है अर्थात दूसरे शब्दों में कहा जाये तो…

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं अर्जुन को उपदेश देते हुये कहा है कि तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ! उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिन: !! अध्याय 4, श्लोक 34 ज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ, उनको भलीभाँति…

उस समय गोस्वामी तुलसीदास को अयोध्या के पंडों ने अयोध्या से अपमानित करके भगा दिया था ! तब गोस्वामी तुलसीदास बनारस में काशी नरेश के दरबार में उपस्थित हुये और उनसे आग्रह किया कि “मैं भगवान श्रीराम पर एक ग्रंथ…