yogeshmishralaw

yogeshmishralaw

किसे एलोपैथी इलाज नहीं करवाना चाहिये  

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भौतिक शरीर (पिण्ड) और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अत्यंत गहरा संबंध है। जब किसी कुण्डली में उच्च चेतना और असाधारण खगोलीय ऊर्जा का निर्माण होता है, तो आधुनिक रासायनिक औषधियां (एलोपैथी) शरीर पर सकारात्मक प्रभाव नहीं डाल…

किसी के शिष्य नहीं बल्कि स्वयं गुरु बनिये

मेरा विचार आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च और सबसे विशुद्ध शिखर है, जहां मार्गदर्शक का उद्देश्य अपने पीछे अनुयायियों की भीड़ खड़ी करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को ‘स्व में स्थिर’ करके उसे स्वयं का आलोक बनने के लिये प्रेरित करना…

शैव ग्राम विश्व का प्रथम आध्यात्मिक प्राकृतिक विश्वविद्यालय

शैव ग्राम मानवता की नई दिशा और प्राकृतिक ईश्वरीय ऊर्जा के साथ जीवन की कला का प्रत्यक्ष प्रगटीकरण है ! हाल ही में आयोजित एक विशेष बैठक में ‘शैव ग्राम’ नामक एक अत्यंत प्रभावशाली और महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की…

शैव ग्राम चेतना का तीर्थ

शैव ग्राम केवल 10 एकड़ का भूखंड या आवासीय प्रकल्प नहीं है; यह पिण्ड (मानव देह) और ब्रह्मांडीय लय के पूर्ण एकाकार का एक जीवंत ‘पारिस्थिकीय तीर्थ’ है। आधुनिक समाज कृत्रिम जीवनशैली, वैचारिक विषाक्तता और स्नायविक ताप से जल रहा…

उमंग ही शरीर का वास्तविक भोजन है

आपने भी ने अपने जीवन में यह अनुभव किया होगा कि जब हम कोई ऐसा काम करते हैं जिसमें हमारी कोई रुचि नहीं होती, तो हमें बार-बार भूख लगती है, थकान हावी होने लगती है और मन किसी न किसी…

उच्च चेतना के महापुरुषों को बस सिर्फ प्राकृतिक चिकित्सा ही क्यों लेनी चाहिये

उच्च चेतना के महापुरुषों के लिए प्राकृतिक चिकित्सा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि उनके भौतिक शरीर (पिण्ड) को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रचंड प्रवाह के बीच जीवित और संतुलित रखने का एकमात्र विशुद्ध वैज्ञानिक व्यवस्था है। जब चेतना पूरी तरह से…

ईश्वर को समर्पण का नियम

प्राय: लोग जीवन की चुनौतियों, पारिवारिक कलह या असफलताओं से भागने के लिए ‘धर्म’ या ‘वैराग्य’ का चोला ओढ़ लेते हैं। इसे पलायनवाद कहा जाता है, आध्यात्मिकता नहीं। गृहस्थ आश्रम को सभी आश्रमों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि…

इस जगत का गुरु एक ही है शिव

संसार के प्रशिक्षण स्थल में हम सब केवल सहयोगी हैं इस अनंत ब्रह्मांड में परम सत्य केवल एक ही है, और उस सत्य का बोध कराने वाले आदिगुरु केवल शिव हैं। जब हम चेतना के सर्वोच्च शिखर की बात करते…

आपदा में उदय की ग्रह व्यवस्था

जिस प्रकार सघन अंधकार ही भोर के प्रथम प्रकाश को जन्म देता है, उसी प्रकार मनुष्य की विपदाएं और उसकी कमजोरियां ही उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करती हैं। वैदिक ज्योतिष में जन्म कुण्डली के छठे, आठवें और बारहवें…

आपके जीवन का दिशा-सूचक ग्रह

शरीर और चेतना का प्रथम मिलन बिंदु है लग्न, और लग्नेश का बल ही मनुष्य को आपदा से निकालकर उसके वास्तविक उदय का मार्ग प्रशस्त करता है। वैदिक ज्योतिष में ‘लग्न’ का अर्थ है मनुष्य का अपना शरीर, उसका स्वभाव,…