अंतर्द्वंद में फंसा संघ

भारतीय समाज में जब धर्म, दर्शन और राजनीति का संवाद होता है, तो अक्सर गहरे वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आते हैं। हाल के समय में, जब बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के नेतृत्व द्वारा हिंदू (सनातन) धर्म और इस्लाम के…

भारतीय समाज में जब धर्म, दर्शन और राजनीति का संवाद होता है, तो अक्सर गहरे वैचारिक मतभेद उभरकर सामने आते हैं। हाल के समय में, जब बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के नेतृत्व द्वारा हिंदू (सनातन) धर्म और इस्लाम के…

भारत की कुंडली (वृषभ लग्न) में कन्या राशि पांचवें भाव में आती है, जो शेयर बाजार, नीतियां और जनता की सोच का प्रतिनिधित्व करता है। 10 अक्टूबर 2026 को अश्विन कृष्ण अमावस्या है और चंद्रमा और सूर्य दोनों ही कन्या…

कारोबार बंद होने का मुख्य ज्योतिषीय कारण शनि, बुध और दशम (कर्म) या एकादश (आय) भाव की ऊर्जा का कमजोर होना है। बुध व्यापार की बुद्धि देता है, शनि स्थायित्व और छठा भाव व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में विजय देता है। जब…

ज्योतिष शास्त्र में स्वतंत्रता के बाधित होने, कानूनी विवादों, या किसी भी प्रकार के एकांतवास (चाहे वह वास्तविक कारावास हो या मानसिक रूप से बंधा हुआ महसूस करना) को ‘बंधन योग’ या ‘कारावास योग’ कहा जाता है। कुंडली में मुख्य…

सुकून हमेशा ही सस्ता होता है, लेकिन हमारे दिखावे की आदत उसे महंगा बना देती है ! अर्थात मानसिक शांति को किसी तामझाम की जरूरत नहीं होती है। वह बहुत छोटी और सहज चीजों में मिल जाती है ! जैसे…

जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही योजना, गहरे अनुभव, उत्साह और स्फूर्ति की जरुरत है ! जो प्राय: हर व्यक्ति में नहीं होता है ! किसी भी बड़े लक्ष्य में ऐसे लोग साथ हो तो लेते हैं, लेकिन उनकी…

शैव दर्शन में शरीर को हेय या तुच्छ नहीं माना गया है, बल्कि इसे शिव की एक पवित्र अभिव्यक्ति और ईश्वरीय वरदान माना गया है। शरीर अपने आप में अंतिम साध्य नहीं है, बल्कि सर्वोच्च लक्ष्य अर्थात् मोक्ष तक पहुँचने…

शैव जीवन दर्शन का पूर्ण स्वरूप :– पहला कदम :– दिखावा छोड़कर अपने सहज समर्थ को स्वीकारिये ! आपको सुकून मिलेगा। दूसरा कदम :– दूसरों को अपनी स्वतंत्रता से जीने दीजिये ! किसी को अपने तरीके से चलाने की जिद्द…

शैव ग्राम एक ऐसा जीवंत और ऊर्जावान केंद्र बन सकता है जहाँ शिक्षा बोझ न होकर आत्म-विकास का माध्यम हो। इस संस्थागत परियोजना का उद्देश्य बच्चों को एक सुरक्षित, प्राकृतिक और समग्र विकास वाला वातावरण प्रदान करना है। आधुनिक ज्ञान…

आज मानवता कंक्रीट की दीवारों और कृत्रिम जीवन की घुटन में सिसक रही है। तनाव, अवसाद और बाज़ारवाद की अंधी दौड़ ने मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से खोखला कर दिया है। प्रकृति लहूलुहान है, बेज़ुबान जीव उजड़ रहे…