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मोटिवेशनल स्पीकर के चक्कर में आत्महत्या मत करो

बाजारवाद से प्रेरित वर्तमान ‘मोटिवेशनल उद्योग’ आज भारतीय युवाओं में ऊर्जा के बजाय गहरा अवसाद पैदा कर रहा है। रातों-रात सफलता के जो झूठे सपने मंच से बेचे जा रहे हैं, वह युवाओं को हताशा के ऐसे अंधेरे में धकेल…

मैं शिष्य क्यों नहीं बनाता हूँ

मानवीय चेतना और मनोविज्ञान की गहराइयों में उतरने पर मैंने किसी को भी बिना तैय्यारी के शिष्य नहीं बनाने का निर्णय लिया है, यह शिष्य न बनाने का निर्णय किसी अहंकार का नहीं, बल्कि मानव मन की जटिलताओं और उसकी…

मुझे कथावाचकों से बचाओ

आज जन्माष्टमी है, आज रात्रि भगवान श्रीकृष्ण का पूजन आदि करके प्रसाद लेकर मैं विश्राम कर ही रहा था कि मुझे स्वप्न में लगा जैसे भगवान श्रीकृष्ण मेरे स्वप्न में आये हैं, वह बहुत दुखी हैं और कह रहे हैं…

मुक्ति की कामना से बड़ी मुर्खता कोई नहीं है

केवल अपने दुखों और संघर्षों से घबराकर आत्म सुधार की जगह जन्म-मरण से मुक्ति की चाह रखना एक प्रकार का मानसिक पलायन ही है। ईश्वर का आदर्श और अवतार का मर्म समझे बिना इस तरह की कामना करना मानसिक रोग…

मुक्ति की अवधारण मानसिक रोगियों की सोच है

मध्यकाल से लेकर आधुनिक युग तक, धर्म गुरुओं और सांप्रदायिक व्याख्याकारों ने मोक्ष की जो स्वार्थी और पलायनवादी धारणा गढ़ी, उसने संपूर्ण समाज की ऊर्जा को कुंठित कर दिया। जब मुक्ति को संसार से भागकर जंगलों या आश्रमों में छिपने…

आत्मविश्वास जगाने में ग्रहों की भूमिका

आत्म-विश्वास किसी बाज़ार में बिकने वाली कृत्रिम वस्तु नहीं है, बल्कि यह सूर्य के सत्य और मंगल के पुरुषार्थ से जाग्रत होने वाली वह प्रखर अग्नि है जो मनुष्य को जीवन के हर समर में अजेय बनाती है। वैदिक ज्योतिष…

अदम्य साहस और प्रज्ञा का चरम उत्कर्षीय ग्रह योग

जिस मनुष्य के भीतर उद्यम का अदम्य साहस और विचार की निर्मलता एक साथ जन्म लेते हैं, वही अपने पुरुषार्थ से समाज का सच्चा उदय करता है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, भूमि और पराक्रम का कारक माना…

हमें शैव ग्राम क्यों चाहिये

आधुनिक मनुष्य जिस दुनिया में सांस ले रहा है, वह असल में ईंट-पत्थर या प्राकृतिक संपदा से अधिक, संगठनों और गढ़ी हुई व्यवस्थाओं का एक जटिल ढांचा है। शिक्षा प्रणाली से लेकर आर्थिक तंत्र और कॉरपोरेट संरचनाओं तक, यह सभी…

हमें अपने जीवन का संविधान स्वयं बनाना चाहिये

संविधान की प्रस्तावना और उसके आदर्श कागजों पर बहुत सुंदर और त्रुटिहीन लगते हैं, लेकिन यथार्थ की खुरदरी जमीन पर उतरते ही ये अक्सर खोखले और निरर्थक साबित होते हैं। समानता, न्याय और सार्वभौमिकता के यह सिद्धांत जब सत्ता, स्वार्थ…

हम ईश्वर को धोखा कैसे देते हैं?

जीवन में ईश्वर की कृपा को मापने का वास्तविक पैमाना क्या है? असीमित धन, कृत्रिम विलासिता या समाज में झूठा दिखावा? कदापि नहीं। परमेश्वर की सच्ची कृपा केवल उन सात शाश्वत स्तंभों में निवास करती है, दो वक्त की शुद्ध…