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आध्यात्मिक संस्थान चलाने का तरीके

स्वयंसेवकों को आकर्षित करने और युवाओं को स्थायी रूप से एक वैचारिक आंदोलन से जोड़ने के लिए यह व्यावहारिक रणनीतियाँ सबसे अधिक कारगर सिद्ध होती हैं ! आज का युवा और विदेशी नागरिक कृत्रिम मार्केटिंग के बजाय प्रामाणिकता की ओर…

आत्मविश्वास जगाने में ग्रहों की भूमिका

आत्म-विश्वास किसी बाज़ार में बिकने वाली कृत्रिम वस्तु नहीं है, बल्कि यह सूर्य के सत्य और मंगल के पुरुषार्थ से जाग्रत होने वाली वह प्रखर अग्नि है जो मनुष्य को जीवन के हर समर में अजेय बनाती है। वैदिक ज्योतिष…

आत्मज्ञान से क्यों बचना चाहिए ।

सामान्यतः आध्यात्मिक जगत में ‘आत्मज्ञान’ को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य और मोक्ष का द्वार माना जाता है। हर साधक इसी की प्राप्ति के लिए जप, तप और ध्यान करता है। लेकिन एक अत्यंत गूढ़ और व्यावहारिक दृष्टिकोण यह भी है…

भविष्य का जीवन असंभव के उस पार ही है

“असंभव” मानसिक जड़ता है, जो हमारे संकीर्ण सोच की अभिव्यक्ति मात्र है, जो हमारे अज्ञात भय और सीमित सोच से निर्मित होता है। इसे चिंतन पाथ को बदल कर बदला जा सकता है। भविष्य का जीवन सदैव असंभव के उस…

अब मनुष्य को धर्म ग्रंथों की कपोल कल्पित दुनिया से निकलना होगा

जैसे-जैसे विज्ञान और ब्रह्मांड को लेकर मनुष्य की समझ गहरी हो रही है, समाज में यह बहस तेज हो गई है कि हमें प्राचीन मान्यताओं को किस रूप में देखना चाहिए। मानव जाति के सामने आज जलवायु परिवर्तन, बीमारियां और…

अपने ही जीवन काल में मत मरो

मनुष्य केवल श्वास लेने और भौतिक सुख-सुविधाएं भोगने के लिये पैदा नहीं हुआ है। जो व्यक्ति केवल अपने वर्तमान और व्यक्तिगत स्वार्थ तक सिमट कर रह जाता है, उसका वैचारिक और आध्यात्मिक अस्तित्व उसके जीवित रहते ही समाप्त हो जाता…

अधिवक्ता को देवतों का सेनापति क्यों कहते हैं

यह पूरी दुनियां जब आपका शोषण कर रही होती है, आपको डरा रही होती है, उस समय आपका कोई साथ नहीं दे रहा होता है, तब अधिवक्ता ही है जो आपके अधिकारों की रक्षा के लिये अपना मान स्वाभिमान जीवन…

अदम्य साहस और प्रज्ञा का चरम उत्कर्षीय ग्रह योग

जिस मनुष्य के भीतर उद्यम का अदम्य साहस और विचार की निर्मलता एक साथ जन्म लेते हैं, वही अपने पुरुषार्थ से समाज का सच्चा उदय करता है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस, भूमि और पराक्रम का कारक माना…

अति ज्ञान की लालसा क्यों व्यर्थ है

सैद्धांतिक तौर पर, ‘बुद्धिमत्ता यह जानने में है कि किन चीज़ों को नज़रअंदाज़ करना है।’ जीवन में सफलता के लिए चयनात्मक दृष्टिकोण बहुत आवश्यक है, जिससे “ज्ञान” आपकी प्रगति का एक उपयोगी उपकरण बने, न कि ऐसा भारी बोझ बन…

अगले 90 दिन भारत का प्रसव काल

आज 04 अक्टूबर 2026 है, मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी स्थापना कुंडली, प्रमुख ग्रहों के गोचर और ग्रहणों के प्रभाव से गहराई से जुड़ा होता है। स्वतंत्र भारत की कुंडली वृषभ लग्न और कर्क राशि…